हनुमानगढ़। अटल भूजल योजना के तहत निर्मित डिग्गियों की बकाया अनुदान राशि का भुगतान नहीं होने से नाराज किसानों ने शुक्रवार को पूर्व घोषणा के अनुसार जिला कलक्ट्रेट के समक्ष महापड़ाव शुरू कर दिया। कर्ज लेकर डिग्गियों का निर्माण कराने के बावजूद करीब दो साल से अनुदान राशि का इंतजार कर रहे किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। धरनास्थल पर हुई सभा में गेहूं की सरकारी खरीद में गड़बड़ियों की जांच और धान, मूंग व मूंगफली की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग भी उठाई गई। धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका और आम आदमी पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष सुभाष मक्कासर ने कहा कि अटल भूजल योजना के तहत हनुमानगढ़ जिले में करीब 1239 डिग्गियों की स्वीकृति जारी हुई थी।

किसानों ने सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कर्ज लेकर डिग्गियों का निर्माण पूरा कर लिया, लेकिन करीब दो साल बीतने के बाद भी स्वीकृत तीन लाख रुपए प्रति डिग्गी के अनुदान में से किसानों को भुगतान नहीं हुआ है। किसान नेताओं के अनुसार 1239 डिग्गियों के हिसाब से करीब 3.72 करोड़ रुपए की अनुदान राशि किसानों को मिलनी है। राशि नहीं मिलने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। नेताओं ने कहा कि किसानों की ओर से किसान आयोग के अध्यक्ष, प्रभारी मंत्री, प्रभारी सचिव और स्थानीय प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं में किसानों को लाभ देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर किसानों को अपने ही हक की राशि के लिए धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

गेहूं खरीद की गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा
धरनास्थल पर हुई सभा में किसानों ने गेहूं की सरकारी खरीद में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं ने इसकी जांच करवाने की मांग की। इसके साथ ही धान, मूंग और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग सरकार के सामने रखी गई। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। खरीद व्यवस्था में किसी तरह की अनियमितता होने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

‘आचार संहिता के बावजूद हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे’
किसानों ने कहा कि उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि 21 अगस्त से जिला कलक्ट्रेट के समक्ष महापड़ाव शुरू किया जाएगा और उसी के तहत शुक्रवार को धरना शुरू किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि आचार संहिता लागू हो या कोई अन्य परिस्थिति, किसान अपने हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। सभा में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने जल्द बकाया अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया और किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आगामी निकाय एवं पंचायती राज चुनाव में भाजपा के बहिष्कार जैसा निर्णय लेने पर किसान मजबूर हो सकते हैं। नेताओं ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा।
