-किसानों के लिए हकीकत संस्थान ने घोषित किए समर्थन मूल्य
हनुमानगढ़। कुदरती खेती को बढ़ावा देने और जहर मुक्त कृषि के उद्देश्य से कार्य कर रहे कुदरती खेती संस्थान हकीकत की वार्षिक बैठक 14 मार्च 2026 को धान मंडी स्थित कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में किसानों और उपभोक्ताओं ने “हमारा सपना जहर मुक्त हनुमानगढ़ अपना” के संकल्प के साथ कुदरती खेती के विस्तार और संस्थान की गतिविधियों को मजबूत बनाने का निर्णय लिया। बैठक में संस्था सचिव प्रेम महिया ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिनमें संस्थान द्वारा स्वयं का कोल्ड स्टोरेज स्थापित करना और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए नई प्रोसेसिंग मशीनों की शुरुआत प्रमुख है। इन मशीनों के माध्यम से किसानों के उत्पादों की सफाई, प्रसंस्करण और पैकिंग बेहतर ढंग से की जा सकेगी, जिससे बाजार में उन्हें उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। बैठक में डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के तहत हकीकत संस्थान की प्ले स्टोर एप्लिकेशन और आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च करने की जानकारी भी दी गई। इन प्लेटफॉर्म के जरिए किसान अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक ऑनलाइन बेच सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध व जहर मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा। संस्थान ने वर्ष 2026 के लिए कुदरती खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य भी घोषित किए। इसके तहत गेहूं 4350 रुपये, सरसों 7400 रुपये, पीली सरसों 8400 रुपये, मूंगफली 7500 रुपये, चना 7500 रुपये, जौ 3500 रुपये, मूंग 10,000 रुपये और मुंगी 12,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी जाएगी। इसके अलावा आलू की खरीद 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सदस्य किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देने के लिए सामूहिक फसल बीमा योजना लागू करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। योजना के तहत प्राकृतिक आपदा, बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। कुदरती खेती के प्रचार-प्रसार के लिए मनीराम पूनिया के नेतृत्व में प्रत्येक माह अलग-अलग स्थानों पर सेमिनार आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इन सेमिनारों के माध्यम से नए किसानों को कुदरती खेती से जोड़ने और रसायन मुक्त खेती के लाभों की जानकारी दी जाएगी। बैठक में फसलों की रासायनिक जांच और न्यूट्रीशन वैल्यू की जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। संस्थान का लक्ष्य वर्ष के अंत तक इस प्रयोगशाला की शुरुआत करना है, जिससे कुदरती खेती से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी। “जहर मुक्त हनुमानगढ़” अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक गांव में एक किसान के खेत को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई गई। संस्थान से वर्तमान में लगभग 250 किसान जुड़े हुए हैं, जहां आसपास के किसानों और आम लोगों के लिए निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सदस्य किसानों को हर वर्ष देसी बीज नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का निर्णय भी दोहराया गया। संस्थान के अध्यक्ष भगवान सिंह खुड़ी ने कहा कि हकीकत संस्थान का सपना है—“हमारा सपना जहर मुक्त हो हनुमानगढ़ अपना।” उन्होंने बताया कि बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक किसान अपने आसपास कम से कम एक किसान साथी को कुदरती खेती से जोड़ेगा, ताकि यह अभियान तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ जिले में यह संभवतः एकमात्र ऐसा संस्थान है, जहां किसान अपनी फसल का भाव स्वयं तय करते हैं और उपभोक्ता उसी उत्पादन को खुशी-खुशी स्वीकार करते हैं। उन्होंने संस्थान के संस्थापक स्वर्गीय ओमप्रकाश माँझू के योगदान को याद करते हुए कहा कि किसानों और उपभोक्ताओं के संगम के रूप में रखी गई संस्था की नींव आज भी उसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही है। बैठक के दौरान स्टोर प्रभारी प्रवीण गोदारा ने उपस्थित किसानों और उपभोक्ताओं को प्रोसेसिंग यूनिट्स, मशीनों और कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण भी करवाया। बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि अगली बैठक 14 अप्रैल को हनुमानगढ़ टाउन में भगवान सिंह खुड़ी के खेत में आयोजित की जाएगी, जहां किसानों को कुदरती खेती की लाइव ट्रेनिंग दी जाएगी। बैठक में मनीराम पूनिया, भगवान सिंह खुड़ी, फतेह सिंह, राहुल शर्मा, राकेश गोदारा, प्रेम महिया, बलजिंदर सिंह, नारायण सिंह, काशीराम कस्वां, भागीरथ मटोरिया, गोविंद कस्वां, अजय सियाग, जगदीश सिंह, जगदेव सिंह, हरदीप सिंह, राजेंद्र गोदारा और मदन जयानी सहित अनेक किसान व उपभोक्ता उपस्थित रहे।
