– राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व चेयरमैन के नेतृत्व में हनुमानगढ़ पहुंची ईडब्ल्यूएस जनजागृति यात्रा
हनुमानगढ़। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण का वास्तविक लाभ दिलाने तथा पात्रता की जटिल शर्तांे को समाप्त करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी उद्देश्य को लेकर ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच की ओर से राजस्थान मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मांग के साथ जनजागृति यात्रा निकाली जा रही है। बुधवार को राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व चेयरमैन धर्मंेद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में यह यात्रा हनुमानगढ़ पहुंची। टाउन स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित कार्यशाला एवं विचार गोष्ठी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राठौड़ ने कहा कि मंच पूरे राजस्थान में व्यापक जनजागरण अभियान चला रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि जनवरी 2019 में केन्द्र सरकार ने ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया था, जिसका सभी वर्गांे ने स्वागत किया। हालांकि, पात्रता के लिए निर्धारित पांच शर्तंे इतनी जटिल थीं कि बड़ी संख्या में जरूरतमंद युवा इसका लाभ लेने से वंचित रह गए। राठौड़ ने बताया कि आरक्षण के लिए आठ लाख रुपए से कम वार्षिक आय के साथ पांच एकड़ से कम कृषि भूमि, ग्रामीण क्षेत्र में 200 गज से कम प्लॉट, शहरी क्षेत्र में 100 गज से कम प्लॉट और एक हजार वर्ग फीट से कम फ्लैट जैसी शर्तंे लागू थीं। इन नियमों के कारण राजस्थान में बड़ी संख्या में युवाओं के ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र नहीं बन पा रहे थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न समाजों और संगठनों की ओर से लगातार ज्ञापन सौंपे जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले की समीक्षा करवाई। इसके बाद आय सीमा की शर्त को यथावत रखते हुए भूमि और भवन से संबंधित चार शर्तांे को हटा दिया गया। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में युवाओं के ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनने लगे और उन्हें सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिलने लगा। राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में यह व्यवस्था लागू होने के बावजूद केन्द्र सरकार की नौकरियों और केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में आज भी पुरानी पांचों शर्तंे लागू हैं। इससे राजस्थान के युवाओं को केन्द्र स्तर पर आवेदन करते समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के अलावा गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी इन अव्यावहारिक शर्तांे को समाप्त किया जा चुका है जबकि पांच अन्य राज्यों में इस पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि केन्द्र सरकार भी राजस्थान मॉडल को अपनाते हुए ईडब्ल्यूएस आरक्षण की पात्रता से भूमि और भवन संबंधी जटिल शर्तांे को हटाए, ताकि देशभर के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को समान अवसर मिल सकें। इसके साथ ही पंचायत राज एवं स्थानीय निकाय चुनावों में भी ईडब्ल्यूएस वर्ग को आरक्षण देने की मांग उठाई गई। राठौड़ ने बताया कि गैर-राजनीतिक ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच की जनजागरण यात्रा अब तक प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केन्द्र सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली अथवा जयपुर में गांधीवादी तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रेस वार्ता के दौरान विधायक गणेश राज बंसल, देवेन्द्र पारीक भी मौजूद रहे।
