– किसान प्रतिनिधियों का दावा-बायोमेट्रिक के बाद किसानों के नाम से बिक्री दिखाकर हो रहा भुगतान, जांच की मांग
हनुमानगढ़। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर किसान प्रतिनिधियों ने आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को किसान भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दावा किया गया कि कई मामलों में किसानों का गेहूं अभी तक उनके घरों में पड़ा है, लेकिन उनके नाम से बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद गेहूं बिकना दर्शाकर भुगतान तक कर दिया गया है। किसान नेता रेशमसिंह माणुका ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में व्यापारी भूमिका निभा रहे हैं और किसानों के खातों में आए भुगतान को निकलवाने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे किसानों के सामने यह चिंता खड़ी हो गई है कि उनका वास्तविक गेहूं सरकारी समर्थन मूल्य पर बिकेगा भी या नहीं। उन्होंने कहा कि इस सीजन में सरकारी खरीद की शुरुआत से ही किसान और छोटे व्यापारी परेशान हैं। पहले बायोमेट्रिक सिस्टम और बाद में स्लॉट व्यवस्था को लेकर विरोध होता रहा, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रेशमसिंह माणुका ने आरोप लगाया कि कई किसान डेढ़ माह पहले मंडियों में गेहूं लेकर पहुंचे थे, लेकिन उनका गेहूं अब तक नहीं बिका। वहीं कुछ किसानों का हाल में आया गेहूं बिक चुका है और भुगतान भी खातों में पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में किसान का गेहूं घर पर पड़ा हुआ है, जबकि उसके नाम से बायोमेट्रिक पूरी कर बिक्री दर्शाई गई और भुगतान भी जारी हो गया। बाद में व्यापारियों की ओर से किसानों से राशि निकालकर देने को कहा जा रहा है। किसान प्रतिनिधियों का आरोप है कि मंडियों और फैक्ट्रियों में किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपना गेहूं उठा लें, अन्यथा बिक्री नहीं होगी। इससे किसानों में भ्रम और चिंता की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब किसान मंडियों में गेहूं लेकर पहुंचे थे, तब उसमें नमी करीब 11 प्रतिशत थी, लेकिन लंबे समय तक पड़े रहने से नमी बढ़कर 12 से 13 प्रतिशत हो गई है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई है और किसानों को नुकसान का खतरा है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जिले की विभिन्न मंडियों हनुमानगढ़ जंक्शन, टाउन, तलवाड़ा झील, पीलीबंगा, संगरिया आदि में किसानों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित किसानों को बुलाकर जांच की जाए तथा गेहूं से भरी ट्रॉलियों की कांटा पर्ची, फैक्ट्रियों में कुल तौल और बकाया गेहूं का मिलान कराया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। साथ ही पड़ोसी राज्यों के गेहूं की बिक्री और बारदाना वितरण में कथित अनियमितताओं की भी जांच की मांग की गई। प्रेस वार्ता में रायसाहब चाहर, सुभाष गोदारा, बलविंद्र सिंह सहित अन्य किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
