हनुमानगढ़। न्यायालय के आदेश पर घग्घर नदी के पानी से सिंचाई के लिए शुक्रवार को करणीसर सहजीपुरा गांव में पुलिस जाप्ते के साथ पाइप लाइन जोड़ने पहुंचे प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। इससे एकबारगी गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जेसीबी की सहायता से जैसे ही पाइप लाइन जोड़ने के लिए खुदाई कार्य शुरू कराया गया, तभी एक गुट के ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद डीएसपी मीनाक्षी चौधरी, तहसीलदार हरीश सारण एवं सदर थाना प्रभारी राकेश सांखला के समक्ष अपना आक्रोश व्यक्त किया।

विरोध के दौरान एक बुजुर्ग ग्रामीण पतराम अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों ने उसे संभालकर चारपाई पर लिटाया और पानी पिलाया। बाद में उसे वाहन के माध्यम से नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया। प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने विरोध कर रहे ग्रामीणों से समझाइश के प्रयास किए और उन्हें बताया कि यदि उन्हें आपत्ति है तो वे सक्षम न्यायालय में अपील कर सकते हैं। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील भी की। गौरतलब है कि घग्घर नदी से सिंचाई पाइप लाइन जोड़ने की मांग को लेकर करणीसर सहजीपुरा गांव के कुछ किसान पिछले पांच दिनों से जिला कलक्ट्रेट के सामने बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनरत किसानों का कहना है कि घग्घर नदी से जोड़ी गई पाइप लाइन को कुछ लोगों ने तोड़ दिया था, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

किसानों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी पाइप लाइन को पुन: नहीं जोड़ रहे हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, शुक्रवार को पाइप लाइन बिछाने का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग अपने निजी उपयोग के लिए सरकारी गली के बीच से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछवाना चाहते हैं। इससे आसपास के मकानों को नुकसान हो रहा है और दीवारों में सीलन आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में एक मकान की दीवार गिर चुकी है, जिसे पाइप लाइन बिछवाने वालों ने नहीं बनवाया। उन्हें आशंका है कि गली के बीच से पाइप लाइन बिछने पर अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता है। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय से स्टे होने के बावजूद प्रशासन जबरन सरकारी गली से ही पाइप लाइन बिछाने पर आमादा है। उन्होंने मांग की कि पाइप लाइन को सरकारी गली के बजाय किसी अन्य वैकल्पिक मार्ग से खेतों तक पहुंचाया जाए, ताकि आवासीय मकानों को नुकसान न हो।
