– नए भवन से पुराने भवन में शिफ्ट करने पर धरना-प्रदर्शन, स्टाफ को अंदर बंद कर डीन के इस्तीफे की मांग
हनुमानगढ़। राजकीय कृषि महाविद्यालय के नए भवन को चुनाव के लिए अधिग्रहित किए जाने के बाद विद्यार्थियों को टाउन स्थित पुराने भवन में शिफ्ट किए जाने से नाराज छात्र-छात्राओं ने बुधवार को महाविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर और एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोहित जावा के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने नए भवन को किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य, प्रशासनिक गतिविधि या ठहराव के लिए उपयोग नहीं करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित विद्यार्थियों ने कॉलेज स्टाफ को अंदर बंद कर महाविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। विद्यार्थियों ने प्रभारी डीन के इस्तीफे की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे संघर्ष के बाद क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर कृषि शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नए भवन का निर्माण हुआ है। ऐसे में भवन को चुनाव अथवा किसी अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधि के लिए उपयोग किए जाने से विद्यार्थियों की कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। विद्यार्थियों ने मांग की कि नए भवन को केवल पढ़ाई, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और कॉलेज से संबंधित शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाए। डीसीसी अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने करोड़ों रुपए की लागत से कृषि महाविद्यालय के नए भवन की सौगात क्षेत्र के विद्यार्थियों को दी थी। भवन में विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन अब नए भवन को चुनाव के लिए अधिग्रहित कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि नए भवन का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए करने के बजाय इसे जल्द से जल्द विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह शुरू किया जाना चाहिए। मक्कासर ने पुराने कॉलेज भवन की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा भवन जर्जर अवस्था में है। छतों से पपड़ियां गिर रही हैं और सरिए बाहर निकल आए हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि कॉलेज में करीब 280 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि विद्यार्थियों से लाइब्रेरी, खेल सहित विभिन्न सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कॉलेज में समुचित लाइब्रेरी और खेल मैदान नहीं होने की बात भी विद्यार्थियों ने उठाई।
डीन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
विद्यार्थियों ने डीन पर निर्धारित समय पर कॉलेज में उपस्थित नहीं होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विद्यार्थियों के कॉलेज आने में देरी होने पर जुर्माना लगाया जाता है, जबकि फीस जमा कराने में दो दिन की देरी पर भी पेनल्टी वसूली जाती है। विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रशासन से व्यवस्थाओं में सुधार करने और सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की। छात्र-छात्राओं ने प्रधानाचार्य/निदेशक, राजकीय कृषि महाविद्यालय के नाम ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मांग की गई कि नए कॉलेज भवन का उपयोग केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाए। किसी भी गैर-शैक्षणिक गतिविधि, प्रशासनिक अथवा राजनीतिक ठहराव की अनुमति नहीं देने की मांग की गई। ज्ञापन में नए भवन के अधूरे कार्यांे और मूलभूत सुविधाओं को शीघ्र पूरा करवाकर इसे पूर्ण रूप से संचालित करने की मांग भी रखी गई। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षण संस्थान के नए भवन में शिक्षा के अलावा अन्य गतिविधियों की अनुमति दी गई तो छात्र हित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।
