हनुमानगढ़। जिला परिषद कार्यालय के बाहर एक घुमंतु परिवार द्वारा न्याय की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर उनकी शिकायतों की सुनवाई नहीं होने के कारण मजबूर होकर उन्हें भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। परिवार का कहना है कि कई बार अधिकारियों को ज्ञापन देने और समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। धरने पर बैठे पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि उनका परिवार पिछले काफी समय से प्रताड़ना और अन्याय का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार शिकायत देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने जिला परिषद कार्यालय के सामने भूख हड़ताल शुरू की है, ताकि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचे और उन्हें न्याय मिल सके। धरनास्थल पर बैठे पीड़ित ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण उन्हें इस कठोर कदम को उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी ने भी पीड़ित परिवार के आंदोलन को समर्थन दिया है। पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने धरनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता जताई। पार्टी नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए। विकास झोरड़ जिला अध्यक्ष लोक जनशक्ति पार्टी का कहना है कि यदि किसी परिवार को न्याय पाने के लिए भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और न्याय पाने का अधिकार है, इसलिए प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। धरने पर बैठे व्यक्ति ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती है या किसी प्रकार की अनहोनी होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी पीड़ा को समझेगा। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने भी प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द समाधान किया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके और उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करनी पड़े। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर लोगों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन जल्द ही इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई करेगा।
