हनुमानगढ़। डांगावास हत्याकांड में विशेष न्यायालय द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सामाजिक समरसता न्याय मंच ने विधि सम्मत अपील करवाने की मांग उठाई है। मंच की ओर से मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम जिला कलेक्टर, हनुमानगढ़ को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानून में उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का प्रभावी उपयोग करने की मांग की गई। ज्ञापन में मंच ने कहा कि डांगावास हत्याकांड भूमि विवाद से जुड़ी एक गंभीर एवं संवेदनशील घटना थी, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। मंच के अनुसार 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित समाचारों में प्रकरण से संबंधित विशेष एससी-एसटी न्यायालय द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किए जाने की जानकारी सामने आई। फैसले के बाद पीड़ित परिवारों और आमजन में निराशा तथा न्याय को लेकर चिंता उत्पन्न हुई है। सामाजिक समरसता न्याय मंच ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य न्यायालय के निर्णय की अवमानना करना नहीं है, बल्कि कानून में उपलब्ध अपील के अधिकार का उपयोग करते हुए निष्पक्ष एवं न्यायोचित निर्णय सुनिश्चित करवाना है।

मंच ने मांग की कि बरी किए जाने के निर्णय की विधिक समीक्षा करवाकर कानून के अनुसार उपयुक्त अपील उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को तत्काल अनुशंसा भेजी जाए। साथ ही अपील की कार्यवाही में अनुभवी एवं सक्षम लोक अभियोजक अथवा विधि विशेषज्ञ के माध्यम से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की मांग की गई। ज्ञापन में पीड़ित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने और अपील की प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने, प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों एवं दस्तावेजों की विधि अनुसार समीक्षा करवाने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की गई कि कोई महत्वपूर्ण तथ्य या साक्ष्य छूटने न पाए। इसके अलावा मृतकों के आश्रित परिवारों की वर्तमान स्थिति का पुनः आकलन कर नियमानुसार आर्थिक सहायता, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक लाभ उपलब्ध करवाने की मांग भी रखी गई। मंच ने ज्ञापन की मांगों को राज्य सरकार एवं संबंधित उच्चाधिकारियों तक तत्काल पहुंचाकर की गई कार्रवाई से संगठन एवं पीड़ित पक्ष को अवगत करवाने की मांग की। मंच ने कहा कि छह लोगों की हत्या के बावजूद किसी को सजा नहीं मिलने से कामगार समाज के लोगों में न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्ञापन में संबंधित जांच अधिकारियों की कथित लापरवाही पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि वह होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। सामाजिक समरसता न्याय मंच ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो कामगार समाज की ओर से प्रदेश स्तर पर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन के अंत में कहा गया कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी है। ज्ञापन पर मंच के संयोजक रामप्रताप एवं अध्यक्ष की ओर से हस्ताक्षर किए गए।
