– हनुमानगढ़ का एक्यूआई 215 के करीब पहुंचा, पराली का धुआं, वाहनों का प्रदूषण और उड़ती धूल बढ़ा रहे वायु प्रदूषण
हनुमानगढ़। तापमान में अचानक गिरावट के साथ ही हनुमानगढ़ जिले की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। मंगलवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) करीब 215 दर्ज किया गया। जबकि 50 से 100 के बीच एक्यूआई को सामान्य एवं संतोषजनक माना जाता है। ऐसे में बढ़ता वायु प्रदूषण चिंता का विषय बन रहा है। इसके पीछे पराली जलाने के साथ-साथ वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण कार्यांे से उड़ने वाली धूल भी प्रमुख कारण हैं। क्षेत्रीय कार्यालय राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल हनुमानगढ़ के रीजनल ऑफिसर सुधीर यादव ने बताया कि एक्यूआई बढ़ने के पीछे कोई एक विशेष कारण नहीं है। विभिन्न गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता है। शहर में जहां भी निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां से उड़ने वाली धूल हवा को प्रदूषित करती है।

इसके अलावा इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं और सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों का प्रदूषण भी एक्यूआई बढ़ाने में योगदान देता है। उन्होंने बताया कि नवम्बर-दिसम्बर में मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में खेतों में पराली जलाने के कारण भी हनुमानगढ़ क्षेत्र की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। पिछले एक-दो दिनों में जिले का एक्यूआई बढ़ा है, जबकि इससे पहले स्थिति अच्छी थी। रात के समय तापमान में अचानक गिरावट आने से स्मॉग वातावरण में नीचे नहीं आ पाता और प्रदूषण की स्थिति प्रभावित होती है।
बोर्ड ने की ये अपील
सुधीर यादव ने आमजन से दीपावली पर कम से कम पटाखे चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है, वहां निर्माण सामग्री को ढककर रखा जाए, ताकि हवा चलने पर धूल न उड़े। धूल-मिट्टी पर समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाए। किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इससे आसपास के क्षेत्रों की हवा भी प्रदूषित होती है। उन्होंने बाजारों में अलग-अलग वाहनों से जाने की बजाय एक ही वाहन में सामूहिक रूप से जाने की सलाह दी, ताकि वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम किया जा सके। साथ ही नगर परिषद अधिकारियों को भी सुझाव दिया कि सुबह सफाई कर्मचारियों की ओर से सड़कों पर झाड़ू लगाने के दौरान पानी का छिड़काव करवाया जाए, ताकि धूल-मिट्टी हवा में न उड़े।
