हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर की ओर से जारी स्टेट एक्शन प्लान की पालना में विश्व बालश्रम निषेध दिवस के मौके पर शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला बाल कल्याण समिति के तत्वावधान में राजकीय सम्प्रेषण गृह के समीप स्थित झुग्गी बस्तियों में विधिक जागरूकता एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जितेन्द्र गोयल ने कहा कि बाल श्रम समाज के लिए अभिशाप है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि बच्चों से मजदूरी करवाना उनके अधिकारों का हनन है तथा इससे उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय विद्यालय भेजने का आह्वान करते हुए बाल श्रम निषेध से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही बाल संरक्षण संबंधी विभिन्न सरकारी योजनाओं और सहायता सेवाओं के बारे में भी अवगत कराया। कार्यक्रम में लीगल एंड डिफेंस काउंसिल चीफ अधिवक्ता ऋषिराज बेनीवाल ने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बने। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध कानूनी सहायता और संरक्षण संबंधी प्रावधानों की जानकारी भी दी। इस मौके पर बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए नोटबुक, पेंसिल, पुस्तकें एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। वहीं कार्यक्रम को सार्थक बनाते हुए चरण पादुका अभियान के तहत नंगे पैर बच्चों को मौके पर ही चप्पलें पहनाई गईं। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कनिष्ठ सहायक मुकुंद ओझा, बाल कल्याण समिति सदस्य प्रेमचंद शर्मा एवं चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक सहदेव रोझ मौजूद रहे।
