– पॉलीथिन रोकने के लिए लगाई गई मशीनों में नहीं मिल रहे कपड़े के थैले, लोगों ने जताई नाराजगी
हनुमानगढ़। नगर परिषद की ओर से पॉलीथिन थैलियों के उपयोग पर रोक लगाने तथा नागरिकों को कपड़े से निर्मित थैले उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जंक्शन और टाउन क्षेत्र में स्थापित क्लॉथ बैग वेंडिंग मशीनें अब शोपीस बनकर रह गई हैं। अधिकांश मशीनें धूल फांक रही हैं। कुछ तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं तो कई मशीनों में कपड़े के थैले ही उपलब्ध नहीं हैं।

इन मशीनों में पांच रुपए का सिक्का डालने पर कपड़े से निर्मित थैला निकलने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कई मशीनों में सिक्का डालने पर बैग नहीं निकलता जबकि कुछ मशीनों में सिक्का वापस लौट आता है। स्ट्रीट वेंडर टाउन के अध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा और जितेन्द्र मित्तल ने बताया कि नगर परिषद की ओर से करीब दो से ढाई वर्ष पहले सब्जी मंडी तथा हिसारिया मार्केट सहित कई स्थानों पर क्लॉथ बैग वेंडिंग मशीनें लगाई गई थीं, लेकिन यह केवल खानापूर्ति बनकर रह गईं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद एक ओर कपड़े के थैले उपयोग करने का संदेश देती है, जबकि दूसरी ओर मशीनें लगाने के दो माह बाद ही खराब हो गईं। लोग पांच रुपए का सिक्का डालते हैं, लेकिन थैला बाहर नहीं आता।

मशीनों का लाभ नहीं मिलने से लोगों को मजबूरी में पॉलीथिन का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मशीनें लगाकर केवल सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। यदि मशीनें सही तरीके से काम करतीं और उनमें कपड़े के थैले उपलब्ध रहते तो पॉलीथिन उपयोग पर काफी हद तक रोक लग सकती थी। राजीव गुप्ता ने बताया कि शुरूआत में इन मशीनों से लोगों को काफी सुविधा मिली थी। पांच रुपए का सिक्का डालने पर नगर परिषद नाम अंकित कपड़े का थैला निकलता था और लोग उसी में सब्जी तथा अन्य सामान लेकर जाते थे। लेकिन पांच-छह माह बाद कुछ मशीनें बंद हो गईं।

कई बार नगर परिषद प्रशासन को अवगत करवाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि मशीनों की शीघ्र मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया जाए, अन्यथा इन्हें हटाया जाए। वहीं नगर परिषद के भंडारपाल रामकुमार ने बताया कि जंक्शन में तीन तथा टाउन में तीन सहित कुल छह स्थानों पर क्लॉथ बैग वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने सिक्कों की जगह अन्य वस्तुएं डाल दी थीं, जिससे मशीनें खराब हो गई थीं, लेकिन उन्हें ठीक करवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी दो-चार दिनों में मशीनों में कपड़े के थैले भर दिए जाएंगे, जिसके बाद मशीनें फिर से सुचारू रूप से कार्य करने लगेंगी।
