हनुमानगढ़। भारतीय किसान संघ जिला शाखा की मासिक बैठक किसान भवन, जंक्शन में जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सूडा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन की मजबूती, आगामी योजनाओं और किसानों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में बीकानेर संभाग संगठन मंत्री हीराराम ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम समिति संगठन की रीढ़ होती है और यदि ग्राम स्तर पर संगठन मजबूत होगा तो जिले और प्रदेश स्तर पर भी संगठन सशक्त बनेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करें, उनकी समस्याओं को समझें और संगठन से अधिकाधिक लोगों को जोड़ें। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल समस्याएं उठाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संगठन को मजबूत बनाकर समाधान की दिशा में ठोस प्रयास करना भी जरूरी है। प्रदेश मंडी प्रमुख प्रेम बेनीवाल ने आगामी फसल सीजन को देखते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि जिले की प्रत्येक धान मंडी में चार-चार सदस्यीय टीमों का गठन किया जाए, जो मंडियों में होने वाली सरकारी और निजी खरीद प्रक्रिया पर नजर रखें। ये टीमें किसानों को किसी भी प्रकार की अनियमितता, भुगतान में देरी या तौल में गड़बड़ी से बचाने का कार्य करेंगी तथा मौके पर ही समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से समन्वय स्थापित करेंगी। जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सूडा ने कहा कि संगठन केवल नाम से नहीं, बल्कि कार्य से मजबूत होता है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठन की उपलब्धियां तभी सार्थक होंगी, जब हर कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी को समझकर कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ जिला संगठन का नाम प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना गौरव की बात है और इसे और ऊंचाइयों तक ले जाना हम सभी की जिम्मेदारी है। बैठक में प्रांत मंत्री प्रगट सिंह बराड़, संभाग मंत्री राजेंद्र सिंह बराड़, जिला उपाध्यक्ष जगदेव सिंह खोसा, जिला मंत्री हरिश पचार, जिला कोषाध्यक्ष रामेश्वर सुथार, जिला युवा प्रमुख हरविंद्र सिंह बराड़ मौजूद रहे।
प्रशासन के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें
बैठक के पश्चात संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने बड़ोपल क्षेत्र की सेम प्रभावित भूमि को वन विभाग को सौंपने की किसी भी योजना का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों के हितों के विरुद्ध कोई निर्णय लिया गया तो संगठन व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा। इसके अलावा गेहूं की सरकारी खरीद में किए जा रहे नए प्रयोगों को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई।

संगठन ने मांग की कि खरीद व्यवस्था को पूर्व के स्थापित पैटर्न पर ही संचालित किया जाए, जिसमें भराई-उतराई की जिम्मेदारी खरीद एजेंसी की हो। साथ ही यह भी मांग रखी गई कि मंडियों में बनाए गए शेड के नीचे किसानों की फसल रखने के बजाय खरीद एजेंसियां अपनी व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसानों को असुविधा न हो। प्रतिनिधिमंडल ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से भी मुलाकात कर रावतसर ब्रांच और नोरंगदेसर वितरिका में पूरे सप्ताह सिंचाई पानी उपलब्ध कराने की मांग रखी। किसानों ने बताया कि पानी की कमी के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है, इसलिए नियमित जलापूर्ति अत्यंत आवश्यक है।
