महिला दिवस पर संगोष्ठी: समाज में समान अवसर और सम्मान पर हुई चर्चा
हनुमानगढ़। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की भावना के साथ नेहरू मेमोरियल विधि महाविद्यालय, हनुमानगढ़ टाउन में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सीताराम ने की। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सामाजिक जागरूकता के विषय पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. सीताराम ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान और पूजनीय स्थान दिया गया है। नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास की महत्वपूर्ण शक्ति भी है।

उन्होंने कहा कि नारी जीवन की सृजनकर्ता और स्नेह की सरिता है, जिसके योगदान के बिना समाज की प्रगति संभव नहीं है। इतिहास में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, सरोजनी नायडू और कस्तूरबा गांधी जैसी महान महिलाओं ने अपने साहस, त्याग और समर्पण से समाज को नई दिशा दी है। उनके प्रयासों और संघर्षों का ही परिणाम है कि स्वतंत्र भारत के संविधान में महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि संविधान में किसी भी नागरिक के साथ लिंग के आधार पर भेदभाव का प्रावधान नहीं है, जो नारी और पुरुष दोनों को समान गरिमा के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है।

आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल, प्रशासन, कला, साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। इसके बावजूद समाज में अभी भी कई ऐसी चुनौतियां मौजूद हैं जो महिलाओं की प्रगति में बाधा बनती हैं। जब तक समाज की सोच में बदलाव नहीं आएगा और बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त नहीं होगा, तब तक महिलाओं को वास्तविक सम्मान और समान अवसर मिल पाना कठिन रहेगा। इस अवसर पर महाविद्यालय की व्याख्याता क्रांति गिला ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, जब समाज में छुआछूत, सती प्रथा, बाल विवाह और विधवाओं की दुर्दशा जैसी कई कुरीतियां गहराई से जड़ें जमा चुकी थीं। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता का दीप जलाया और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया।

विद्यार्थियों ने गीत, कविता, भाषण और नाटक प्रस्तुत कर समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों में कविता, हर्षिता, नम्रता, राजप्रीत, आकाशदीप, पायल और कौशल्या सहित कई छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महाविद्यालय प्रशासन द्वारा एक विशेष पहल करते हुए विधि तृतीय वर्ष की छात्रा हर्षिता को एक दिन के लिए महाविद्यालय का प्राचार्य बनाया गया।

इस पहल के माध्यम से छात्राओं को महाविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नजदीक से समझने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिला। कार्यक्रम का संचालन नीरज शर्मा, मीनाक्षी धुरिया और क्रांति गिला ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में महिला सशक्तिकरण और समान अधिकारों के संदेश के साथ विद्यार्थियों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया।
