हनुमानगढ़। जिले में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जिला प्रयोगशाला में आवश्यक तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते पानी की नियमित जांच नहीं हो पा रही। इससे आमजन के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। शुक्रवार को शहर के जागरूक नागरिकों ने इस संबंध में पीएचईडी राजस्थान के शासन सचिव के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। नागरिकों के अनुसार नोहर, रावतसर व भादरा को जिला प्रयोगशाला पीएचईडी की ओर से लंबे समय से नकारा किया हुआ है। अधिकारियों ने कभी जिले में आकर जांच नहीं की। हनुमानगढ़ जिला प्रयोगशाला में कनिष्ठ रसायनज्ञ का पद लंबे समय से रिक्त है, वहीं अन्य दो पद भी खाली पड़े हैं। केवल एक जेएलए के सहारे पूरी प्रयोगशाला का कार्य चलाया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि पंजाब की ओर से गंदा पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, लेकिन प्रयोगशाला में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण नियमित और प्रभावी जांच संभव नहीं हो पा रही। फिल्टर प्लांटों में गंदगी जमी होने, सभी फिल्टर चालू न होने और कर्मचारियों की कमी के चलते सिर्फ औपचारिक सैंपलों की खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विभाग के सैंपल तो प्रयोगशाला में पहुंच जाते हैं, लेकिन फील्ड में तहसील स्तर पर क्लोरीन टेस्ट और अन्य आवश्यक जांच नियमित रूप से नहीं हो पा रही। हनुमानगढ़ शहर में कई स्थानों पर लीकेज की समस्या भी बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं ने शासन से मांग की है कि जिले की प्रयोगशाला में कनिष्ठ रसायनज्ञ और लैब असिस्टेंट की शीघ्र नियुक्ति की जाए, ताकि समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच हो सके और जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता न हो।
