– डीटीओ और डीवाईएसपी बने रिव्यू अथॉरिटी, 50 फीसदी जुर्माना जमा कर ही जा सकेंगे कोर्ट
हनुमानगढ़। राजस्थान सरकार के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने केन्द्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत नई अधिसूचना जारी करते हुए ई-चालान व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए हैं। 20 जनवरी 2026 के गजट नोटिफिकेशन और परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की नई अधिसूचना के तहत मोटर वाहन नियम 167 में संशोधन कर चालान प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और व्यवस्थित बनाया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब वाहन चालक अपने चालान को ऑनलाइन चुनौती दे सकेंगे। इसके लिए ई-चालान पोर्टल और आईटीएमएस पोर्टल पर सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। चालान संबंधी आपत्ति, निस्तारण और भुगतान की प्रक्रिया अब डिजिटल माध्यम से पूरी होगी। संशोधित नियमों के तहत परिवहन विभाग के मोटर वाहन उप निरीक्षक (एमवीएसआई) स्तर या उससे ऊपर के अधिकारी और राजस्थान पुलिस के हेड कांस्टेबल स्तर या उससे ऊपर के अधिकारियों को चालान संबंधी कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। पहले यातायात पुलिस में एएसआई या उससे ऊपर के अधिकारी ही चालान कर सकते थे, लेकिन अब हेड कांस्टेबल भी यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान कर सकेंगे। नई व्यवस्था में पहली अपील का प्रावधान भी जोड़ा गया है। अब किसी भी चालान के खिलाफ संबंधित रिव्यू अथॉरिटी के समक्ष प्रथम अपील की जा सकेगी। परिवहन विभाग के चालानों के लिए जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) को रिव्यू अथॉरिटी बनाया गया है, जबकि यातायात पुलिस के चालानों के लिए डीवाईएसपी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है। नियमों के अनुसार यदि रिव्यू अथॉरिटी चालान को सही मानती है तो संबंधित व्यक्ति को 30 दिन के भीतर चालान राशि जमा करवानी होगी। यदि व्यक्ति कोर्ट जाना चाहता है तो उसे पहले जुर्माना राशि का 50 प्रतिशत जमा करवाना होगा, इसके बाद ही मामला न्यायालय में ले जाया जा सकेगा। नए संशोधन के बाद विभाग की जिम्मेदारी भी सीमित हुई है। पहले यदि कोई व्यक्ति चालान का भुगतान नहीं करता था तो विभाग को मामला कोर्ट भेजना पड़ता था, लेकिन अब रिव्यू अथॉरिटी केवल चालान को स्वीकार या अस्वीकार करेगी। आगे की कार्रवाई संबंधित व्यक्ति को करनी होगी।
कम होगा कोर्ट का भार : डीटीओ
जिला परिवहन अधिकारी नरेश पूनिया के अनुसार इन संशोधनों से अनावश्यक रूप से कोर्ट पहुंचने वाले मामलों में कमी आएगी। पहले कई मामलों में वकीलों की फीस और अन्य खर्चांे के कारण लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। उदाहरण के तौर पर 60 हजार रुपए के चालान के मामले में कुल खर्च 85 हजार रुपए तक पहुंच जाता था, जबकि अब संशोधित व्यवस्था में प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम 167 के तहत जमा की जाने वाली राशि भी अब ई-चालान पोर्टल या आईटीएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा करवाई जाएगी।
