हनुमानगढ़। गेहूं खरीद व्यवस्था को लेकर जिले की मंडियों में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में जिले के व्यापारी वर्ग की जिला कलक्टर के साथ कलक्ट्रेट परिसर में बैठक आयोजित हुई। बैठक में कच्चा आढ़तिया व्यापारी, किसान प्रतिनिधि एवं मजदूर संगठनों ने मंडियों को पांच ब्लॉक में विभाजित कर अलग-अलग खरीद एजेंसियों को लॉटरी के माध्यम से नियुक्त करने के निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई। व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गेहूं खरीद का कार्य केवल एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के माध्यम से ही कराया जाना चाहिए। बैठक में व्यापारियों ने जिला कलक्टर को अवगत कराया कि गत वर्ष रबी सीजन में एफसीआई की ओर से की गई गेहूं खरीद व्यवस्था पूरी तरह सफल और संतोषजनक रही थी। बारदाना वितरण, तौल प्रक्रिया, परिवहन और भुगतान सभी चरण सुचारू रूप से पूरे हुए थे, जिससे किसान, मजदूर और व्यापारी तीनों वर्गांे को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के व्यवस्था में परिवर्तन करना अव्यवस्था को आमंत्रण देने जैसा है। व्यापारियों ने बैठक में कहा कि मंडी को पांच ब्लॉक में बांटकर विभिन्न खरीद एजेंसियों को लाने से तालमेल की कमी, भुगतान में देरी और कार्यप्रणाली में अव्यवस्था की आशंका बढ़ जाएगी। उन्होंने पूर्व वर्षांे के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अन्य खरीद एजेंसियों के साथ समय पर भुगतान न होना, मजदूरों को मेहनताना देर से मिलना और किसानों को अनावश्यक रूप से मंडी में रुकना पड़ना जैसी समस्याएं सामने आई थीं। इसका सीधा नुकसान किसान और मजदूर वर्ग को उठाना पड़ा था। किसान प्रतिनिधियों ने भी बैठक में समर्थन देते हुए कहा कि एफसीआई की व्यवस्था भरोसेमंद और पारदर्शी है। समय पर भुगतान होने से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है। मजदूर संगठनों ने भी स्पष्ट किया कि एफसीआई के साथ काम करने में मजदूरों को मजदूरी समय पर मिलती है और कामकाज व्यवस्थित रहता है। जिला कलक्टर ने व्यापारियों की बातों को गंभीरता से सुना और इस संबध में सरकार को अवगत करवाने का आश्वासन दिया। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की कि मंडी को पांच ब्लॉक में बांटने का निर्णय वापस लेकर केवल एफसीआई को ही गेहूं खरीद की जिम्मेदारी सौंपी जाए। बैठक में पदम जैन, रामलाल किरोड़ीवाल, दलीप सिंह, प्रवीण तलवाड़िया, इन्द्राज देग, पवन बंसल, सोहन सिंह, बालकृष्ण कर्मचन्दानी सहित कई व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।
