हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत रामसरा नारायण में मनरेगा कार्यांे के आवंटन को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इस संबंध में सोमवार को मनरेगा श्रमिकों ने जिला कलक्टर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा पंचायत समिति विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पंचायत कर्मचारियों पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। मनरेगा श्रमिकों ने आरोप लगाया कि पंचायत के कुछ कर्मचारी मिलीभगत कर केवल अपने चहेते श्रमिकों को ही मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि आधे से अधिक मजदूर घरों पर बैठे हुए हैं। जब इस संबंध में कर्मचारियों से शिकायत की जाती है तो वे मनमानी करते हुए कहते हैं कि सूची में उन्हीं लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे जिन्हें वे चाहेंगे। मनरेगा श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सत्र में कार्यरत कई श्रमिकों के 100 दिन पूरे होने से पहले ही उनका कार्य बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में अधिकांश श्रमिक अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पंचायत के एलडीसी पर भी अपने परिचितों और समर्थकों को प्राथमिकता देकर कार्य उपलब्ध कराने का आरोप लगाया। मनरेगा श्रमिकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा सभी पात्र श्रमिकों को समान रूप से मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 12 जून को ग्राम पंचायत रामसरा नारायण का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस मौके पर पोकरमल, सावित्री, इन्द्रा, तुलसी, सुनीता, गीता, शम्मू देवी, उर्मिला, सुमित्रा, अमृतपाल, कृष्णा देवी, वरिन्द्र आदि मौजूद रहे।
