चारणवासी। गांव रतनपुरा में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। शुभारंभ श्रीराम के जयकारों के जयघोष के साथ हुआ। सम्मेलन में भारत माता आश्रम नोहर के संचालक रामनाथ अवधूत ने अपने संबोधन में सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा आज हमें समाज में छुआछूत और भेदभाव की दीवारों को ढहाने की आवश्यकता है। सनातनी होने का अर्थ ही है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः हमें जाति व्यवस्था के नाम पर बंटने के बजाय, एक होकर राष्ट्र के विकास में योगदान देना होगा।धर्म जागरण मंच के मुख्य वक्ता रामस्वरूप कामड़ ने सनातन संस्कृति की गौरवगाथा सुनाई। उन्होंने प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। मनीषा ने महिलाओं का नेतृत्व करते हुए महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया, जिसे सुनकर वहां मौजूद महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया। सम्मेलन में गांव के सभी मंदिरों के पुजारियों ने एक साथ मंच पर आकर सामाजिक समरसता (भाईचारे) की बात की, जो पूरे गांव के लिए एक बड़ा और सकारात्मक संदेश था। मंच का संचालन कर रहे सतीश गोल्याण ने कहा कि एकता का एक नया अध्याय लिखा गया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी एक वर्ग ने नहीं, बल्कि गांव के हर तबके और हर जाति के लोगों ने भाग लिया। इस असवर पर पूर्व पंचायत समिति सदस्य मोहनलाल सुथार,रामेश्वर सहारण,ओम गोस्वामी,सुभाष सिहाग,महेन्द्र बालमिकी,कृष्ण,पवन भांभु,रमेश न्यौल,,कृष्ण गोदारा,रामजी नाई,देवीराम गोदारा,हजारी सिहाग,हीरालाल खलेरी सहित ग्रामीण उपस्थित थे।
