हनुमानगढ़। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था एवं जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही रात्रिकालीन गश्त के दौरान पुलिस टीम को मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक सराहनीय सफलता मिली। रात्रि करीब 1 बजे आठ नंबर चुंगी क्षेत्र में गश्त के दौरान चेतन प्रभारी पप्पू राम मीणा, हेड कांस्टेबल, अपनी टीम के साथ मौजूद थे। इसी दौरान एक नाबालिग मंदबुद्धि बालक संदिग्ध अवस्था में अकेले घूमता हुआ पाया गया। पुलिस टीम द्वारा बालक से पूछताछ करने पर वह अपने बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ पाया गया। बालक की मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और उसके साथ मानवीय व्यवहार करते हुए उसकी देखरेख की। प्रारंभिक जांच में बालक की उम्र करीब 13 वर्ष प्रतीत हुई, किंतु उसकी पहचान और निवास स्थान की कोई ठोस जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। बालक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया। बालक की फोटो लेकर उसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, ताकि उसके परिजन या परिचितों तक सूचना पहुंचाई जा सके। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद कुछ ही समय में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई और बालक की पहचान बबलू पुत्र रूप सिंह, जाति वाजीगर, उम्र 13 वर्ष, निवासी मसानी टिब्बी के रूप में हुई। सूचना मिलते ही पुलिस द्वारा बालक के पिता रूप सिंह से संपर्क किया गया। आवश्यक सत्यापन एवं औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद आज बालक को सकुशल उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। अपने पुत्र को सुरक्षित पाकर पिता रूप सिंह एवं परिवारजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस टीम की सतर्कता, मानवीय दृष्टिकोण एवं सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग की सराहना की जा रही है। यदि समय रहते बालक को सुरक्षित नहीं लिया जाता, तो उसके साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। पुलिस की तत्परता से न केवल एक नाबालिग की जान सुरक्षित रही, बल्कि एक परिवार को भी पुनः मिलाया जा सका। पुलिस प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं कोई नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ या बेसहारा व्यक्ति दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को दें। साथ ही सोशल मीडिया का जिम्मेदार और सकारात्मक उपयोग समाजहित में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है। यह घटना पुलिस और समाज के बीच सहयोग का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
