-अनुबंधित बसों के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन, 3000 नई बसों की मांग
हनुमानगढ़। राजस्थान रोडवेज वर्कर्स यूनियन सीटू के आह्वान पर रोडवेज बचाओ अभियान के तहत सोमवार को हनुमानगढ़ रोडवेज डिपो में कर्मचारियों ने प्रदर्शन सभा आयोजित कर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि अनुबंधित बसों की व्यवस्था बंद कर रोडवेज के बेड़े के लिए कम से कम 3000 नई बसें खरीदी जाएं तथा विभाग में खाली पड़े करीब 12 हजार पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोक परिवहन सेवा के नाम पर निजी बसों को परमिट देने की नीति से राजस्थान रोडवेज लगातार कमजोर हो रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि निजी परमिट जारी करने की व्यवस्था बंद की जाए और रोडवेज को मजबूत बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का बकाया भुगतान भी लंबे समय से लंबित है, जिसे जल्द जारी किया जाना चाहिए। सभा में वक्ताओं ने श्रम कानूनों में किए गए संशोधनों को वापस लेने की मांग भी उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि इन संशोधनों से श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा खरीदी जा रही इलेक्ट्रिक बसों को राजस्थान रोडवेज के बेड़े में शामिल करने की मांग की, ताकि रोडवेज सेवाओं को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि रोडवेज कर्मचारियों को समय पर साप्ताहिक विश्राम मिलना चाहिए और 3000 किलोमीटर की शर्त के नाम पर रोकी गई सैलरी का तुरंत भुगतान किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सभा को राजस्थान रोडवेज वर्कर्स यूनियन सीटू के उप महासचिव श्योदान राम सेषमा, प्रदेश सह सचिव विक्रांत सहारण, सेवानिवृत्त कल्याण समिति के पृथ्वी महला, सहीराम यादव, लिच्छीराम चाहर, उदयपाल, रतिराम तथा गुरचरण सिंह सहित सीटू जिला कमेटी के सुलतान खान सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सरकार ने रोडवेज और कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार 200 से अधिक बसों को सड़क पर उतारने की तैयारी कर रही है, लेकिन ये बसें अनुबंध के आधार पर चलाई जाएंगी। इसके बावजूद सरकार इन्हें रोडवेज की बसें बताकर प्रचार कर रही है, जो आम जनता को गुमराह करने जैसा है। कर्मचारियों ने कहा कि रोडवेज को मजबूत करने के लिए अनुबंधित बसों के बजाय स्थायी रूप से नई बसों की खरीद आवश्यक है।
