हनुमानगढ़। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने राजकीय विद्यालयों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी दखल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। महासंघ ने स्पष्ट किया कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं और शिक्षकों को राजनीतिक एजेंडे का माध्यम बनाने का हर प्रयास अस्वीकार्य है। महासंघ ने हाल ही में एक राजकीय विद्यालय में कथित निरीक्षण के दौरान हुए विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ बाहरी लोगों के विद्यालय में प्रवेश का ग्रामीणों ने विरोध किया, जिससे विवाद और कथित गाली-गलौज व मारपीट की स्थिति बनी। संगठन ने कहा कि हिंसा का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी गंभीर प्रश्न है कि राजनीतिक विवादों को विद्यालय परिसरों तक क्यों ले जाया जा रहा है।
निर्धारित प्रक्रिया से ही हो प्रवेश
महासंघ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं या शैक्षणिक स्थिति को लेकर आपत्ति है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम उपलब्ध हैं। बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश कर राजनीतिक माहौल बनाना उचित नहीं है।
शिक्षा सुधारों का किया समर्थन
संगठन ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा विद्यालयी शिक्षा में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों और विद्यालयों में बाहरी हस्तक्षेप रोकने संबंधी दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। महासंघ ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों में सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है, न कि आम नागरिकों के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाना।
शिक्षकों को राजनीति से दूर रखने की मांग
महासंघ ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं। विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, शक्ति प्रदर्शन या टकराव का मंच बनाना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
सभी पक्षों से शांति की अपील
एबीआरएसएम ने ग्रामीणों, अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से अपील की कि विद्यालयों से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी राजकीय विद्यालय में नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक गतिविधि या बाहरी हस्तक्षेप का प्रयास हुआ तो वह संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाएगा। महासंघ ने बताया कि वह राजस्थान के लगभग 10,000 विद्यालयों में जुड़े शिक्षक कार्यकर्ताओं के माध्यम से भौतिक संसाधनों की उपलब्धता, शैक्षणिक सुधार और विद्यालयों को आदर्श शिक्षण केंद्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
