संगरिया। संगरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रात्रिकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो मजदूर मारपीट की घटना में घायल हो गए थे, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन रात के समय अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण उन्हें समय पर समुचित उपचार नहीं मिल सका।

इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है और आमजन में आक्रोश का माहौल है। ग्राम पंचायत मक्कासर के प्रशासक बलदेव सिंह के अनुसार सूचना मिलने पर वे रात्रि करीब तीन बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब दो घंटे तक अस्पताल परिसर में घूमने के बावजूद कोई चिकित्सक या जिम्मेदार स्टाफ नजर नहीं आया। चिकित्सकों के कक्षों पर ताले लगे हुए थे। काफी शोर-शराबा करने के बाद एक कर्मचारी कमरे से बाहर आया, जिसने अभद्र व्यवहार करते हुए कहा कि मरीज के परिजनों के आने के बाद ही इलाज किया जाएगा।

बलदेव सिंह ने कहा कि यदि इतने बड़े शहर के अस्पताल की स्थिति ऐसी है तो ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि रात्रि के समय कोई गंभीर आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसी मामले में रोहिताश शाक्य ने बताया कि दोनों घायल मजदूरों की हालत गंभीर थी और उन्हें रेफर करने की आवश्यकता थी।

इसके बावजूद न तो उनका रेफर कार्ड बनाया गया और न ही उन्हें समुचित प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। वे लंबे समय तक दर्द से कराहते रहे, लेकिन उनकी देखभाल के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर मौजूद नहीं था। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन व चिकित्सा विभाग से मांग की है कि अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा रात्रिकालीन ड्यूटी की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
