हनुमानगढ़। नगर परिषद की सरकारी भूमि के कथित रूप से गलत तरीके से पट्टे जारी करने के करीब 23 साल पुराने मामले में हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल, उनकी पत्नी तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष संतोष बंसल सहित पांच लोगों के खिलाफ जंक्शन थाना पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। यह मामला वर्ष 2003 में जंक्शन स्थित सेक्टर 9-एल की भूमि से जुड़े आवासीय पट्टों को लेकर है। शिकायतकर्ता आरटीआई कार्यकर्ता संदीप सोनी (35) पुत्र रतनलाल सोनी की ओर से दी गई रिपोर्ट में निर्दलीय विधायक गणेश राज बंसल, उनकी पत्नी एवं तत्कालीन नगर परिषद चेयरपर्सन संतोष बंसल, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी तथा एक भूखंड धारक के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत अपराध बनना बताया गया है। चूंकि रिपोर्ट में वर्तमान विधायक के खिलाफ आरोप हैं, पुलिस ने विभागीय प्रावधानों के तहत दोनों मामलों का अनुसंधान सीआईडी-सीबी से करवाए जाने की प्रक्रिया अपनाई है।
सेक्टर 9-एल की सरकारी भूमि से जुड़ा मामला
शिकायत में कहा गया है कि जंक्शन के सेक्टर नंबर 9-एल की कॉलोनी वर्ष 1965 में डिप्टी प्लानर, बीकानेर की ओर से तैयार की गई थी। इस कॉलोनी की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में 10 जनवरी 1960 से मंडी विकास समिति हनुमानगढ़ के नाम दर्ज थी। यहां मंडी समिति की ओर से 170 भूखंड काटे गए थे तथा सड़कों, सार्वजनिक पार्कांे और स्कूल के लिए भी भूमि छोड़ी गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इनमें से 70 भूखंडों का विक्रय किया गया, जबकि शेष भूखंडों एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर बाद में कुछ लोगों ने कथित रूप से कब्जे कर लिए। इन्हीं कब्जाधारियों में से एक के भूखंड को वर्ष 2003 में नगर परिषद की ओर से आवासीय पट्टा जारी किया गया।
दोनों रिपोर्टांे में अलग-अलग पट्टों का उल्लेख
मामले में प्रस्तुत दोनों रिपोर्टांे में अलग-अलग भूखंडों का उल्लेख है। एक रिपोर्ट में राजरानी चुघ से संबंधित भूखंड नंबर 16 का पट्टा 13 अक्टूबर 2003 को पंजीकृत किए जाने का आरोप है। दूसरी रिपोर्ट में कृष्णारानी से संबंधित भूखंड नंबर 08 का पट्टा 18 अक्टूबर 2003 को पंजीकृत किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन पट्टों में दर्शाई गई भूमि का विवरण राजस्व रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता था तथा संबंधित मुरब्बा नंबर के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी ने पूर्व में इस भूमि को नगर परिषद की भूमि बताते हुए अवैध कब्जे हटाने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन बाद में कथित मिलीभगत से संबंधित पट्टे जारी कर दिए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि तत्कालीन उपखंड अधिकारियों की संयुक्त रिपोर्ट 25 अगस्त 2003 को जिला कलक्टर को भेजी गई थी। इसके बाद जिला कलक्टर की ओर से 29 सितंबर 2003 को संबंधित प्लॉट को अवैध अतिक्रमण बताते हुए पट्टा जारी नहीं करने के निर्देश दिए जाने का भी दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद कई पट्टे जारी कर पंजीकृत करवाए गए।
करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भूमि को निजी भूमि बताकर संबंधित लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और इससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। साथ ही नगर परिषद की भूमि को कथित रूप से अवैध तरीके से वैध कराने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू की है।
