हनुमानगढ़। जिले के सक्रिय समाजसेवी योगेश कुमावत ने सामाजिक सेवा, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में निरंतर योगदान के बल पर एक और राष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। उन्हें सामर्थ्य सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सामर्थ्य ग्लोबल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स–2026 समारोह में ‘समर्थ्य राजस्थान गौरव अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके वर्षों से चले आ रहे जमीनी कार्य, समावेशी सोच और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए प्रयासों की औपचारिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। यह गरिमामय समारोह झालरापाटन स्थित होटल गीतांजलि में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से सामाजिक, प्रशासनिक, शिक्षा और खेल जगत की कई विशिष्ट हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों को मंच प्रदान कर उनके कार्यों को व्यापक पहचान दिलाना भी रहा।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाया समारोह का गौरव
समारोह के मुख्य अतिथि महाराजा राणा चन्द्रजीत सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता अजय सिंह राठौड़, जिलाधिकारी, द्वारा की गई। मंच पर उपस्थित वक्ताओं ने समाजसेवा, नवाचार और जमीनी स्तर पर परिवर्तन लाने वाले प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल समाजसेवियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी सकारात्मक दिशा मिलती है। सामर्थ्य सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को रेखांकित करना नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की परंपरा को मजबूत करना है। उन्होंने योगेश कुमावत को ऐसे व्यक्तित्व के रूप में बताया, जिन्होंने सीमित संसाधनों में भी बड़े सामाजिक परिवर्तन की मिसाल पेश की है।
सामाजिक, शैक्षणिक और खेल क्षेत्र में बहुआयामी योगदान
योगेश कुमावत वर्तमान में राही सोशल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष हैं। वे पिछले कई वर्षों से शिक्षा, सामाजिक सरोकार और खेल—इन तीनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहते हुए जमीनी स्तर पर बदलाव का कार्य कर रहे हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे केवल योजनाएं नहीं बनाते, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर उनके क्रियान्वयन में जुटते हैं। विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए संसाधन जुटाना, उन्हें प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना और राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना उनकी पहचान बन चुकी है। खेल को वे केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का माध्यम मानते हैं।
पैरा कबड्डी में राजस्थान की ऐतिहासिक सफलता
योगेश कुमावत के मार्गदर्शन, सहयोग और निरंतर प्रयासों का प्रतिफल हाल ही में उस समय देखने को मिला, जब राजस्थान की पैरा कबड्डी टीम ने नेशनल पैरा कबड्डी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। यह उपलब्धि केवल एक खेल जीत नहीं, बल्कि समावेशी समाज की दिशा में उठाया गया एक ठोस और प्रेरक कदम मानी जा रही है। खेल विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि दिव्यांग खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलें, तो वे किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। योगेश कुमावत का कार्य इसी सोच का सजीव उदाहरण है।
समाजसेवा तक सीमित नहीं, मानवीय मूल्यों के संवाहक
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि योगेश कुमावत का योगदान केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक, शैक्षणिक और मानवीय मूल्यों को सशक्त करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। बच्चों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना, युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और विभिन्न सामाजिक अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाना उनके कार्यों का अहम हिस्सा है। उनकी कार्यशैली में परंपरा का सम्मान और आधुनिक जरूरतों की समझ-दोनों का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही कारण है कि युवा, दिव्यांगजन और वंचित वर्ग उन्हें केवल समाजसेवी नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में देखते हैं।
समाज के हर वर्ग से मिल रहा सम्मान और समर्थन
अपने प्रयासों के माध्यम से योगेश कुमावत ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों में आत्मनिर्भरता और आगे बढ़ने का विश्वास भी मजबूत किया है। उनके कार्यों का प्रभाव यह है कि उन्हें समाज के हर वर्ग से निरंतर समर्थन और सम्मान मिलता रहा है। इस अवसर पर नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक अध्यक्ष शंकर सोनी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल योगेश कुमावत की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा, सम्मान और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे समाजसेवी युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं और प्रशासन व समाज को मिलकर इनके प्रयासों को और अधिक विस्तार देना चाहिए।
सम्मान मिलने के बाद भावुक प्रतिक्रिया
सम्मान प्राप्त करने के बाद योगेश कुमावत ने अपने संबोधन में कहा, “यह अवॉर्ड मेरे लिए व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि उन सभी युवाओं, खिलाड़ियों और जरूरतमंदों की मेहनत का सम्मान है, जिनके साथ मिलकर हमने काम किया है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहा है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक अवसर पहुंचे। खेल, शिक्षा और सेवा-ये तीनों मिलकर ही एक मजबूत और संवेदनशील समाज का निर्माण करते हैं। आगे भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इसी मार्ग पर कार्य करता रहूंगा।” उनके इस वक्तव्य ने समारोह में उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और लंबे समय तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
प्रेरणा का स्रोत बनते सामाजिक कार्य
कुल मिलाकर, योगेश कुमावत को मिला ‘समर्थ्य राजस्थान गौरव अवॉर्ड’ न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि समर्पण, संवेदनशीलता और निरंतर प्रयासों से समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव संभव है। उनकी यह उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगी।
