रावतसर। हनुमानगढ़ न्यायालय परिसर में वर्ष 2016 में दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में करीब दस वर्ष बाद अदालत का फैसला आ गया। रावतसर के अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजन खत्री (आरजेएस) की अदालत ने बहुचर्चित प्रकरण में तीन मुख्य आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं एक आरोपी को आर्म्स एक्ट में दोषी मानते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई, जबकि दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अपर लोक अभियोजक उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि अदालत ने आरोपी सुखवीर सिंह उर्फ महन्तो, धर्मेन्द्र सिंह और श्रवणराम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 307/34 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने इन तीनों को आजीवन कारावास के साथ ही क्रमशः 7 वर्ष और 2 वर्ष के कठोर कारावास की अतिरिक्त सजा सुनाई। साथ ही अलग-अलग धाराओं में 20 हजार, 5 हजार और 3 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। एक अन्य आरोपी निर्मलसिंह उर्फ निम्मा सिंह को आर्म्स एक्ट के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास और 3 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। वह करीब ढाई वर्ष से न्यायिक हिरासत में था, इसलिए उसकी सजा पूरी मानी गई। वहीं आरोपी राजवीर निवासी शेरेकां (थाना टिब्बी) और प्रकट सिंह निवासी चक ज्वालासिंहवाला को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
अदालत परिसर में हुई थी दिनदहाड़े फायरिंग
मामला 1 अगस्त 2016 का है, जब हनुमानगढ़ न्यायालय परिसर में पेशी के दौरान अचानक फायरिंग हो गई थी। शिकायतकर्ता मोनू सिंह उर्फ सुरजीत सिंह अपने साथियों के साथ अदालत कक्ष के बाहर खड़ा था। इसी दौरान आरोपी सुखवीर सिंह और धर्मेन्द्र सिंह पिस्तौल लेकर पहुंचे और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। सुखवीर ने बलराम को निशाना बनाकर गोली चलाई, लेकिन गोली पास खड़े हरीश पुत्र शीतलदास को लग गई। गोली लगते ही हरीश जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल हरीश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मौजूद लोगों ने दोनों हमलावरों को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि आरोपी श्रवणराम वहां से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया।
लगभग एक दशक चली न्यायिक प्रक्रिया
घटना के बाद थाना हनुमानगढ़ जंक्शन में एफआईआर संख्या 374/2016 दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद छह आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र अदालत में पेश किया। मामला वर्षों तक अलग-अलग अदालतों में चलता रहा और कई बार स्थानांतरण के कारण सुनवाई लंबी खिंचती रही। अंततः 4 जून 2025 को यह प्रकरण रावतसर अदालत को स्थानांतरित हुआ, जहां अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद शनिवार को फैसला सुनाया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों के बयान और 78 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
मृत्युदंड की मांग ठुकराई
सजा के प्रश्न पर अभियोजन पक्ष ने तीनों मुख्य आरोपियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। हालांकि बचाव पक्ष ने इसे आरोपियों का पहला अपराध बताते हुए नरमी बरतने की अपील की। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अपराध गंभीर और न्यायालय परिसर में घटित हुआ है, लेकिन इसे “विरल से विरलतम” श्रेणी का मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की सजा उचित है।
