हनुमानगढ़। धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू करवाने की मांग को लेकर किसानों ने बुधवार को जंक्शन धानमंडी स्थित कृषि उपज मंडी समिति कार्यालय में प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी समिति अधिकारियों से वार्ता कर धान की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करवाने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की मांग उठाई। अखिल भारतीय किसान सभा के ओम स्वामी व निवर्तमान सरपंच बलदेव सिंह ने कहा कि मंडी में पीआर धान की बोली 1700 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास लग रही है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपए है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल करीब 600 से 700 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ओम स्वामी ने कहा कि धान की सरकारी खरीद का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि पिछले दस साल से किसान इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी किसानों ने एकजुट होकर आंदोलन किया था। उस समय जिला कलक्ट्रेट के सामने धान से भरी ट्रॉलियां खाली कर विरोध जताया गया था। आंदोलन के दौरान किसानों पर लाठीचार्ज भी हुआ, जिसके बाद किसान सरकारी खरीद शुरू करवाने में कामयाब हुए थे। उन्होंने कहा कि हर बार धान मंडी में आने के समय किसानों को सरकारी खरीद शुरू करवाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में व्यापारियों की ओर से दूसरे बाजारों के भाव के अनुपात में बोली नहीं लगाई जा रही। उन्होंने व्यापारी वर्ग और मंडी समिति प्रशासन की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि पीआर धान की कीमत एमएसपी से काफी कम मिल रही है। इससे किसान को प्रति क्विंटल 600 से 700 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। प्रति बीघा के हिसाब से यह नुकसान करीब 10 से 15 हजार रुपए तक पहुंच रहा है।
बासमती के मुकाबले पीआर धान के भाव कम होने से चिंता
ओम स्वामी ने कहा कि धान की फसल लेकर मंडी पहुंचने वाले किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार ने विदेश व्यापार भी खोल रखा है, जबकि बासमती धान के मुकाबले पीआर धान आधे से भी कम भाव पर बिक रहा है। ऐसे में किसानों के सामने लागत निकालने और फसल का उचित मूल्य पाने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से हनुमानगढ़ में तत्काल प्रभाव से धान की सरकारी खरीद शुरू करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपए प्रति क्विंटल मिले, ताकि उन्हें उपज का उचित मूल्य मिल सके और आर्थिक नुकसान से राहत मिले।
