– महिला पुलिसकर्मियों ने व्रत के साथ संभाली जिम्मेदारी, महिलाओं को दिया संदेश-परिवार के साथ अपने स्वास्थ्य और सम्मान का भी रखें ध्यान
हनुमानगढ़। करवा चौथ पर गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने आस्था के साथ अपने कर्तव्य को भी प्राथमिकता दी। महिला कांस्टेबलों ने व्रत रखते हुए ड्यूटी की जिम्मेदारी निभाई। ड्यूटी पूरी करने के बाद महिला पुलिसकर्मियों ने करवा चौथ की कथा सुनी और पूजा-अर्चना की। कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में महिला कांस्टेबलों ने भी सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक भूखे रहकर ड्यूटी की। इसके बाद दोपहर 2 बजे करवा चौथ की कथा सुनी। व्रत के दौरान ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि महिलाओं के लिए परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करना भी महत्वपूर्ण है। एएसपी राज कंवर के निर्देशानुसार महिला पुलिसकर्मियों को दोपहर 2 बजे से हाफ सीएल दी गई, ताकि वे ड्यूटी के बाद पर्व की धार्मिक परंपराएं निभा सकें। कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में तैनात महिला कांस्टेबल माया ने करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं को खास संदेश देते हुए कहा कि महिलाएं किसी की बेटी, बहन, बहू और मां होने के साथ-साथ अपनी अलग पहचान भी रखती हैं। परिवार के प्रति जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्हें अपने स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मसम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला स्वस्थ रहेगी, तभी वह अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर सकेगी। माया ने कहा कि करवा चौथ पर पति की लंबी आयु की कामना करना आस्था का विषय है, लेकिन इसके साथ महिलाओं को अपने जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली की कामना भी करनी चाहिए। चंद्रमा के दर्शन के समय पति की दीर्घायु के साथ पूरे परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें, लेकिन स्वयं को नजरअंदाज न करें।
आस्था के साथ कर्तव्य को भी दी प्राथमिकता
करवा चौथ के दिन जहां महिलाएं घरों में पूजा की तैयारियों और पारिवारिक परंपराओं में व्यस्त रहीं, वहीं महिला पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। माया सहित अन्य महिला कांस्टेबलों ने व्रत रखते हुए पुलिस सेवा का दायित्व संभाला और इसके बाद कथा सुनकर पर्व की परंपरा निभाई। महिला पुलिसकर्मियों की यह दिनचर्या बताती है कि महिलाएं परिवार, आस्था और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती हैं। माया का संदेश भी यही है कि महिलाओं को दूसरों की खुशियों की कामना के साथ अपने स्वास्थ्य, सम्मान और खुशहाल जीवन को भी उतना ही महत्व देना चाहिए।
