हनुमानगढ़। भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई की बैठक शुक्रवार को किसान भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गोपीराम बेनीवाल ने की। इस अवसर पर संगठन का स्थापना दिवस भी उत्साहपूर्वक मनाया गया और किसानों की एकजुटता, संगठन की भूमिका तथा कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय किसान संघ के जिला कोषाध्यक्ष रामेश्वर सुथार ने संगठन के इतिहास और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय किसान संघ की स्थापना 4 मार्च 1979 को राजस्थान के कोटा शहर में राष्ट्रवादी नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी के नेतृत्व में की गई थी। उस समय देशभर के लगभग 650 से अधिक किसान प्रतिनिधियों को एक मंच पर एकत्रित कर इस संगठन की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा कि संगठन शुरू से ही गैर-राजनीतिक स्वरूप में किसानों के हितों की रक्षा के लिए कार्य करता रहा है।

रामेश्वर सुथार ने कहा कि भारतीय किसान संघ का मुख्य उद्देश्य किसानों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए संगठन लगातार किसानों को जागरूक करने, उन्हें संगठित करने और उनकी समस्याओं को प्रशासन व सरकार तक पहुंचाने का कार्य करता रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाने में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि यह राजस्थान के लिए गर्व की बात है कि इतने बड़े और प्रभावशाली किसान संगठन की स्थापना इसी प्रदेश की धरती पर हुई। आज भारतीय किसान संघ न केवल राजस्थान और भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख गैर-राजनीतिक किसान संगठन के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

देश के विभिन्न राज्यों में इसकी इकाइयां सक्रिय रूप से किसानों के अधिकारों और हितों के लिए कार्य कर रही हैं। बैठक के दौरान वक्ताओं ने किसानों से संगठन के साथ जुड़कर एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक किसान संगठित नहीं होंगे, तब तक उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव नहीं है। इसलिए किसानों को आपसी मतभेद भुलाकर संगठन के माध्यम से अपनी आवाज को मजबूत करना चाहिए। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि भारतीय किसान संघ समय-समय पर बैठकों, जागरूकता कार्यक्रमों और ज्ञापन के माध्यम से किसानों की मांगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाता है। संगठन ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से किसानों के मुद्दों को उठाया है और आंदोलन के दौरान कभी भी राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है। बैठक में उपस्थित किसानों ने भी कृषि क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार रखे और संगठन को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। अंत में स्थापना दिवस के अवसर पर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया।
