हनुमानगढ़। केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) से संबंधित नियमों को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की घोषणा के विरोध में श्रमिक संगठनों ने ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया है। इसी सिलसिले में सोमवार को सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स) के जिला कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी विरोध कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियों का विभाजन किया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चारों श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाली हैं। उनका आरोप था कि इन कानूनों के लागू होने से मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रम अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

वक्ताओं ने कहा कि इन नीतियों के कारण देशभर में मजदूर वर्ग में व्यापक असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि 12 फरवरी को श्रमिक संगठनों द्वारा की गई ऐतिहासिक राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बावजूद सरकार अपने फैसले पर अडिग बनी हुई है। ऐसे में श्रमिक संगठनों को आंदोलन को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार श्रमिक विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। बैठक में जानकारी दी गई कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच, स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों और विभिन्न श्रमिक संगठनों ने सर्वसम्मति से 1 अप्रैल 2026 को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का भी समर्थन प्राप्त है, जिससे इस आंदोलन के और व्यापक रूप लेने की संभावना जताई जा रही है।

बैठक के दौरान ‘काला दिवस’ के तहत आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई। इसके अंतर्गत विभिन्न कार्यस्थलों पर श्रमिक काली पट्टी या काले बैंड पहनकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अलावा लंच अवकाश के दौरान नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किए जाएंगे। कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन और जुलूस भी निकाले जाएंगे, जबकि साइकिल और मोटरसाइकिल रैलियों के माध्यम से आमजन को श्रम कानूनों में किए गए बदलावों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। सीटू पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अन्य ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आयोजित करें। उन्होंने अधिक से अधिक श्रमिकों को इस आंदोलन से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि यह संघर्ष श्रमिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।

बैठक में संगठन के सदस्यों के बीच विभिन्न जिम्मेदारियों का भी बंटवारा किया गया, ताकि कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके और अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके। वक्ताओं ने श्रमिकों से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। बैठक को रामेश्वर वर्मा, आत्मा सिंह, शेर सिंह शाक्य, बहादुर सिंह चौहान और गुरप्रेम सिंह ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने श्रमिकों से अपील की कि वे एकजुट होकर ‘काला दिवस’ को सफल बनाएं और सरकार तक अपनी मांगों को मजबूती के साथ पहुंचाएं। बैठक के अंत में उपस्थित सदस्यों ने संकल्प लिया कि 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ के रूप में प्रभावी विरोध दर्ज कराते हुए श्रमिकों की आवाज बुलंद की जाएगी और श्रमिक हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा।
