हनुमानगढ़। चूना फाटक पर प्रस्तावित आरयूबी (रेलवे अंडरब्रिज) के निर्माण को लेकर व्यापारिक, आवासीय एवं व्यवसायिक क्षेत्र में होने वाली संभावित भारी तोड़फोड़ को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने मंगलवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन बार संघ के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सारस्वत के नेतृत्व में सौंपा गया। एडवोकेट जितेन्द्र सारस्वत के अनुसार करीब आठ वर्ष पूर्व चूना फाटक पर एच-टाइप आरओबी प्रस्तावित था। उस समय अधिकारियों की ओर से किए गए विस्तृत सर्वे में यह तथ्य सामने आया था कि आरओबी निर्माण के लिए क्षेत्र की लगभग 29 व्यवसायिक दुकानों, निर्मित मकानों व प्लाटों को अवाप्त करना पड़ेगा, जिसमें दो से तीन वर्ष की लंबी अवधि लग सकती थी। इसी कारण उस योजना को निरस्त कर एच-टाइप आरयूबी को स्वीकृति दी गई थी। अधिवक्ताओं का कहना है कि आठ वर्ष पूर्व जैसी परिस्थितियां आज भी विद्यमान हैं, बल्कि इस अवधि में वहां बड़े पैमाने पर व्यवसायिक गतिविधियां और आबादी और अधिक विकसित हो चुकी हैं। यदि वर्तमान में प्रस्तावित एच-टाइप आरयूबी का निर्माण चूना फाटक पर किया जाता है तो चारों ओर लगभग एक-एक किलोमीटर तक व्यवसायिक दुकानों एवं आवासीय मकानों को तोड़ना व अवाप्त करना पड़ेगा, जिससे अपूर्णीय क्षति होगी, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति को देखते हुए नगर परिषद ने अपनी बैठक में जनहित में कैनाल कॉलोनी के पास आवासीय योजना की पूर्व दिशा में आरयूबी निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था। इसी क्रम में नगर परिषद की ओर से शहर में आवागमन को सुचारू बनाए रखने एवं न्यूनतम नुकसान के आकलन के आधार पर कार्यकारी निदेशक रूडिस्को, जयपुर को पत्र भेजकर कैनाल कॉलोनी आवासीय योजना की पूर्व दिशा में 60 फुटी सड़क पर आरयूबी निर्माण की अनुशंसा की गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की ओर से चूना फाटक पर टीयूवी (ट्रैफिक यूनिट वैल्यू) अधिक होने का हवाला देकर आरयूबी के स्वरूप में बदलाव का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में वहां इतना ट्रैफिक नहीं है। प्रस्तुत टीयूवी आंकड़े लगभग 5-6 वर्ष पुराने सर्वे पर आधारित हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि सतीपुरा ओवरब्रिज, नवां से कोहला बाइपास तथा नेशनल हाइवे-54 नवां पर आरओबी चालू होने के बाद चूना फाटक क्षेत्र का ट्रैफिक काफी कम हो जाएगा। ऐसे में इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण रूप से चालू होने के लगभग छह माह बाद नया ट्रैफिक सर्वे करवाकर ही चूना फाटक पर बनने वाले आरयूबी के डिजाइन पर अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि यह वास्तव में जनता के हित में हो। इस मौके पर रघुवीर वर्मा, रवि कुमार, नरेश पारीक, सुशील झींझा, महेन्द्र, सुरेन्द्र झोरड़ सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
