जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में अवैध हथियारों के संभावित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड की सूचना पर पुलिस ने माणक चौक इलाके में स्थित एक गन स्टोर पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कारतूस, बिना लाइसेंस की राइफल और बाघ की खाल बरामद की है। मामले में गन स्टोर संचालक मोहम्मद जहीरुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने परकोटा क्षेत्र में स्थित ‘शिकार गन हाउस’ और आरोपी के रामगंज इलाके में मोहल्ला बिसायतियान स्थित घर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। तलाशी के दौरान पुलिस को 32 प्रकार के कुल 282 कारतूस मिले, जिनमें कई प्रतिबंधित श्रेणी के हैं। बरामद कारतूसों में 303 बोर और 7.62 बोर के कारतूस भी शामिल हैं, जिनका उपयोग आमतौर पर सेना और पुलिस में किया जाता रहा है। इसके अलावा पुराने हथियारों में इस्तेमाल होने वाले कई अन्य बोर के कारतूस भी मिले हैं। पुलिस ने आरोपी के घर से ‘मेड इन इंग्लैंड’ की .22 बोर की एक अवैध बोल्ट राइफल भी बरामद की है। साथ ही तलाशी के दौरान एक बाघ की खाल मिलने से मामला और गंभीर हो गया है।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत भी इसकी अलग से जांच की जा सकती है। डीसीपी करण शर्मा ने बताया कि मामले में रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका के चलते गन स्टोर के सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पुराने हथियारों पर नए नंबर पिनअप कर रिकॉर्ड में हेरफेर की गई हो सकती है। आशंका है कि नई बंदूकें अवैध तरीके से बेच दी जाती थीं, जबकि रिकॉर्ड में पुरानी बंदूकें ही दिखाकर हिसाब पूरा किया जाता था। पुलिस को शक है कि इस गन स्टोर का संबंध जोधपुर में पकड़े गए अवैध हथियारों के मामले से भी हो सकता है। दरअसल, 1 अप्रैल को जोधपुर की डांगियावास पुलिस ने एटीएस के इनपुट पर कार्रवाई करते हुए जैसलमेर निवासी हेड कांस्टेबल अमीन खां और एलडीसी वांगे खां को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 12 बोर की अवैध बंदूक, 30 जिंदा कारतूस और 12 हजार रुपये बरामद किए गए थे। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने यह हथियार जयपुर के परकोटा इलाके में स्थित ‘शिकार गन हाउस’ से करीब 1 लाख 20 हजार रुपये में खरीदे थे। इसके बाद जयपुर नॉर्थ पुलिस और एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गन स्टोर संचालक मोहम्मद जहीरुद्दीन को 2 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस और एटीएस इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या आरोपी लंबे समय से अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक किन-किन लोगों को अवैध हथियार बेचे गए और उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया। मामले में गिरफ्तार हेड कांस्टेबल अमीन खां और एलडीसी वांगे खां से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि वे हथियार किस उद्देश्य से जैसलमेर ले जा रहे थे और क्या उनका किसी बड़े अवैध हथियार गिरोह से संबंध है। फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है और बरामद हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है।
