चारणवासी। नोहर फीडर के नव निर्माण व 332 क्यूसेक पानी की सहित 10 सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार को नोहर-रावतसर मेगा हाइवे पर स्थित एनएचआर के भगवान हेड पर महापंचायत हुई। जिसमें जुड़े 35 गांवों के 2000 किसानों की 4 घंटे चली महापंचायत जय जवान, जय किसान के जयकारों के जयघोष के साथ महापंचायत शुरू हुई एवं आर-पार की लड़ाई की हुंकार के साथ इसका समापन हुआ। एतिहात के तौर पर नोहर सीआई अजय गिरधर- फेफाना कैलाशचंद – खुईयां सुरेश कुमार मय जाब्ते तैनात रहे व नायब तहसीलदार संजीव कुमार सिहाग प्रशासनिक व्यवस्था में थे। लंबे समय तक प्रशासन के न पहुंचने किसानों में रोष और बढ़ गया। जिसकी सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और देईदास पंचायत घर में हनुमानगढ़ मुख्य अभियंता प्रवीण रूस्तोगी, एसडीएम राहुल श्रीवास्तव,एसई नोहर संजीव कुमार वर्मा,एक्सईएन राजेंद्र प्रसाद व किसानों के शिष्टमंडल के मध्य दो घंटा चली वार्ता में अधिकारियों ने 31 जनवरी तक सरकार के समक्ष नहर निर्माण का प्रस्ताव भेज बजट में बजट घोषणा,31 मार्च तक नोहर फीडर के नव निर्माण की डीपीआर के लिए हरियाणा से एन ओसी दिलाने का हर संभव प्रयास करने व अन्य मांगों के संबंध में स्थानीय अधिकारियों को हल करने का निर्देश दिए।
इन्होंने किया संबोधित
माकपा के रिकरण कसवां,देईदास ग्राम पंचायत प्रशासक राजेंद्र न्यौल, रतनपुरा ग्राम पंचायत प्रशासक जिंदर पाल गोदारा,पंस सदस्य रमेश बेनिवाल,नहरी अध्यक्ष दशरथ गेदर,श्रवण तंवर जगदीश कड़वासरा,प्रेम गोदारा,सुरेंद्र सिहाग,कृष्ण लाल, मनीष मक्कासर, सुरेंद्र सिहाग सहित ने सभा को सम्बोधित किया। विधायक अमित चाचाण ने कहा कि किसानों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में जोर-शोर से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या का स्थाई समाधान ही उनकी प्राथमिकता है।



पूर्व प्रधान सोहन ढिल ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों ने किसानों के बीच आकर बात नहीं सुनी, तो सड़क जाम और टकराव की स्थिति बनेगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अभाकि सभा के जिलाध्यक्ष मंगेज चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसान अब “सफेद कागज” (कोरे आश्वासनों) पर आंदोलन बंद नहीं करेंगे। इस बार जब तक समझौता धरातल पर लागू नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। नहरी अध्यक्ष यूनियन के प्रधान गुरमेल सिंह ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो पुल महीनों से टूटा बताया जा रहा था, आंदोलन की आहट मिलते ही वह रातों-रात कैसे बन गया? यह विभाग की मंशा पर बड़ा सवाल है। एनपी 11 के पूर्व अध्यक्ष काशीराम ढुकिया ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि सन 2000 में 226 क्यूसेक पानी के आधार पर ही 80 हजार एकड़ भूमि को सिंचित घोषित किया गया था, तो आज वह हक क्यों मारा जा रहा है।
