- प्रमाण पत्र निरस्त करने और मुकदमा दर्ज करने की मांग- वार्ड 15 की एससी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी के बीच सामने आया विवाद- नगीना बाई बोलीं-प्रमाण पत्र वैध, चुनाव के समय राजनीतिक विरोध के तहत लगाए जा रहे आरोप
हनुमानगढ़। नगर परिषद हनुमानगढ़ की पूर्व उपसभापति एवं पूर्व पार्षद नगीना बाई के अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड नंबर 15 से आगामी निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी के बीच भट्ठा कॉलोनी निवासी रविन्द्र सिंह बावरी और इशाक खान ने गुरुवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर उनके जाति प्रमाण पत्र की जांच करवाने, प्रमाण पत्र निरस्त करने तथा कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाने और उसका इस्तेमाल करने के मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नगीना बाई ने पूर्व में नगर परिषद चुनाव के दौरान स्वयं को अनुसूचित जाति (बाजीगर) का बताते हुए जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था और अब वर्ष 2026 के निकाय चुनाव में वार्ड 15 की एससी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए भी इसी प्रमाण पत्र के आधार पर दावा कर रही हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार नगीना बाई का जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार हनुमानगढ़ कार्यालय से 9 नवंबर 2009 को जारी किया गया था। इसमें उनका नाम नगीना बाई, चेली छन्नो बाई तथा जाति बाजीगर, निवासी हनुमानगढ़ जंक्शन दर्शाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि नगीना बाई की जन्मजात जाति बाजीगर नहीं है। शिकायत में दावा किया गया है कि नगीना बाई का जन्म पंजाब के खैरपुर गांव में मेघवाल परिवार में हुआ था। शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि प्रमाण पत्र में माता-पिता के नाम एवं उनकी जाति का उल्लेख नहीं है और उसमें ‘चेली छन्नो बाई’ का उल्लेख किया गया है। उनका तर्क है कि किसी व्यक्ति की जाति गुरु की जाति के आधार पर निर्धारित नहीं की जा सकती। शिकायतकर्ताओं ने प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है। आरोप है कि 9 नवंबर 2009 को ही जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया, उसी दिन नगर परिषद की ओर से जांच पूरी कर रिपोर्ट जारी की गई और उसी दिन तहसीलदार हनुमानगढ़ की ओर से प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने आवेदन, जांच रिपोर्ट और प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच करवाने की मांग की है।

वीडियो साक्षात्कार का भी दिया हवाला
शिकायतकर्ताओं ने अपने प्रार्थना पत्र में नगीना बाई के कथित वीडियो साक्षात्कार का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि साक्षात्कार में नगीना बाई ने अपना मूल नाम संतोष बताया तथा कहा कि बाद में उनके गुरु रामप्यारी बाई संगरिया ने उनका नाम नगीना बाई रखा। शिकायत के अनुसार वीडियो में उन्होंने अपना जन्म खैरपुर, अबोहर के पास पंजाब में होना तथा 12 बहनों और दो भाइयों का होना बताया है। साथ ही सात-आठ वर्ष की उम्र में किन्नर समुदाय से जुड़ने और वर्ष 1979 से हनुमानगढ़ में रहने की बात कही है। प्रार्थना पत्र में उच्चतम न्यायालय के सुनीता सिंह बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश मामले में 19 जनवरी 2018 को दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं ने जाति जन्म और माता-पिता से निर्धारित होने का तर्क दिया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर आरोप सही पाए जाने पर कथित रूप से कूटरचित एवं विधि-विरुद्ध जाति प्रमाण पत्र तैयार करवाने तथा उसका इस्तेमाल करने के संबंध में मुकदमा दर्ज करने और प्रमाण पत्र निरस्त करवाने की मांग की है।
नगीना बाई बोलीं-प्रमाण पत्र वैध, बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा
उधर, पूर्व उपसभापति नगीना बाई ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनका एससी जाति प्रमाण पत्र बना हुआ है और उन्होंने इसे घर बैठकर तैयार नहीं करवाया। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र एक ही बार बनता है और उनका प्रमाण पत्र विधिवत बना हुआ है। नगीना बाई ने कहा कि जब उन्होंने भट्ठा बस्ती से दो बार चुनाव लड़ा था, उस समय रविन्द्र सिंह बावरी और इशाक खान उनके साथ थे तथा उनका समर्थन करते थे। तब उन्होंने जाति प्रमाण पत्र को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई। अब चुनाव के समय उनके खिलाफ झूठी बातें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका जन्म पंजाब में जरूर हुआ है, लेकिन वे लंबे समय से हनुमानगढ़ में रह रही हैं। नगीना बाई ने आरोप लगाया कि उनके किन्नर समाज को लेकर गलत नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो पूरे राजस्थान और पंजाब से किन्नर समाज को साथ लेकर विरोध दर्ज करवाएंगी। उन्होंने कहा कि उनका समाज उनके गुरु का ही होता है। यदि शिकायतकर्ताओं को उनके जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति है तो वे प्रशासन के समक्ष शिकायत करें और प्रशासन की ओर से जवाब मांगे जाने पर वे अपनी बात रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जाते रहे तो वे समाज को साथ लेकर शिकायत करेंगी। अब पूरे मामले में पुलिस एवं प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।
