हनुमानगढ़। आगामी होली पर्व को लेकर ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026 को ही किया जाएगा। विद्वानों के मुताबिक उस दिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा विद्यमान है, जबकि 3 मार्च को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी नहीं रहेगी। पं. रतन लाल शास्त्री ने बताया कि 2 मार्च को संपूर्ण प्रदोषकाल एवं अर्द्धरात्रि के बाद प्रातः 5:32 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों के अनुसार सामान्यतः भद्रा में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, लेकिन जब प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा भद्रा में ही पड़ रही हो और प्रदोषकाल में भद्रामुख काल न हो, तब उसी समय होलिका दहन किया जाना शास्त्रसम्मत माना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मसिंधु के अनुसार भद्रामुख के लक्षण अलग होते हैं और 2 मार्च के प्रदोषकाल में भद्रामुख नहीं पड़ रहा है। इसलिए उसी दिन होलिका दहन करना उचित रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 मार्च को प्रदोषकाल सायं 6:25 बजे से रात्रि 8:50 बजे तक रहेगा, जो भद्रा व्याप्त रहेगा। अतः होलिका दहन इसी अवधि में करना शुभ माना गया है।
3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण
पं. शास्त्री ने बताया कि 3 मार्च 2026 को खग्रास चंद्रग्रहण भी लगभग सम्पूर्ण भारत में दिखाई देगा। हनुमानगढ़-गंगानगर क्षेत्र में ग्रहण का स्पर्श सायं 6:32 बजे तथा मोक्ष 6:56 बजे के आसपास रहेगा। वहीं खग्रास ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3:27 बजे माना गया है। ग्रहण के कारण सूतक काल ग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पूर्व लगेगा। इसलिए देवालयों और घरों में पूजा-पाठ, आरती आदि प्रातः 6:25 बजे से पहले ही संपन्न कर मंदिरों के कपाट बंद या पर्दा कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान, संध्या और देव पूजा करना शास्त्रसम्मत रहेगा।
