संगरिया। बढ़ती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच जहां इंसान राहत के साधन तलाश रहा है, वहीं बेजुबान पक्षियों के लिए यह मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे कठिन समय में डेरा सच्चा सौदा की ‘पक्षी उद्धार’ मुहिम के तहत शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादार मानवता की मिसाल पेश करते नजर आ रहे हैं। सेवादारों ने आगे बढ़कर पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाकर एक सराहनीय पहल की है। इस अभियान के तहत संगरिया क्षेत्र में कई स्थानों पर परिंडे लगाए गए। विशेष रूप से सुरेंद्र ई-मित्र प्रतिष्ठान के बाहर और सेवादारों के अपने-अपने घरों की छतों पर पानी से भरे परिंडे बांधे गए, ताकि पक्षियों को आसानी से पानी मिल सके। इस पुनीत कार्य में समाजसेवी अमरनाथ पेंटर और संदीप बाघला इन्सां ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने न केवल परिंडे लगाए, बल्कि यह भी संकल्प लिया कि इनमें नियमित रूप से स्वच्छ पानी भरा जाएगा और समय-समय पर इनकी साफ-सफाई भी की जाएगी, ताकि पक्षियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सेवादारों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में जल स्रोतों के सूख जाने से पक्षियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर या दुकान के बाहर एक छोटा सा परिंडा भी लगा दे, तो यह कई पक्षियों के जीवन को बचाने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यह छोटा सा प्रयास न केवल जीवों के प्रति करुणा का परिचायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नेक पहल की स्थानीय दुकानदारों और आमजन ने भी जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर भीषण गर्मी में इंसान खुद को बचाने के उपाय कर रहा है, वहीं इन सेवादारों ने बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। कई लोगों ने इस अभियान से प्रेरित होकर स्वयं भी अपने घरों और दुकानों के बाहर परिंडे लगाने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मियों के दौरान डेरा सच्चा सौदा द्वारा इस तरह के सेवा कार्य किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देना है। ‘पक्षी उद्धार’ मुहिम भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जो न केवल पक्षियों के जीवन की रक्षा करती है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी करती है। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े बदलाव ला सकती हैं। जरूरत है तो बस संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की, ताकि इस भीषण गर्मी में कोई भी बेजुबान प्यासा न रहे।
