चारणवासी। गांव मलवाणी की श्रीकृष्ण गोशाला में पिछले नौ दिनों से चल रही श्रीभगत माल व गोकथा का शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली और विश्व शांति की कामना को लेकर पांच कुंडी हवन यज्ञ का आयोजन में मुख्य पंडित भीखाराम शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां डलवाई गईं। यज्ञ की गरिमा देखते ही बनती थी, जहां प्रत्येक कुंड पर दस-दस दंपती जोड़ों ने मुख्य यजमान के रूप में बैठकर पूर्ण आहुति दी और क्षेत्र की उन्नति का संकल्प लिया।हवन के पश्चात गोशाला प्रादेशिक परिसर में स्थित श्रीराधा-कृष्ण के मंदिर में विशेष भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रहण करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़े। इस अवसर पर गोशाला कमेटी द्वारा सफल आयोजन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए कथावाचक पंडित भीखाराम शर्मा का राजस्थानी साफा पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

कथावाचक ने कथा स्थल से अपने घरों को कलश वापस ले जा रही महिलाओं को कलश स्थापना और उसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। पंडित भीखाराम शर्मा ने महिलाओं को समझाया कि कलश घर में मंगल और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, इसे विधि-विधान से रखने पर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कथा के अंतिम दिन ग्रामीणों ने केवल धार्मिक रस्मों में ही भाग नहीं लिया, बल्कि सामाजिक सरोकार की मिसाल भी पेश की। हवन-यज्ञ की पवित्र अग्नि के साक्षी बनकर ग्रामीणों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को त्यागने, भविष्य में निरंतर गोसेवा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का सामूहिक संकल्प लिया। कथावाचक ने अपने अंतिम प्रवचनों में गाय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय हमारे समाज की अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिकता की रीढ़ है। इसकी सेवा ही नारायण की सच्ची सेवा है और जिस घर में गोमाता का सम्मान होता है, वहां कभी दरिद्रता वास नहीं करती।
