हनुमानगढ़। मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे गांव 2 केएनजे के युवाओं ने शुक्रवार को अनूठे तरीके से अपनी मांग जिला प्रशासन तक पहुंचाई। गांव के करीब दर्जनभर युवा पूर्व घोषणा के अनुसार रणवीर सिहाग के नेतृत्व में नंगे पांव गांव से रवाना हुए और करीब साढ़े सात किलोमीटर पैदल चलकर जिला कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की। रणवीर सिहाग ने बताया कि गांव में लंबे समय से कई समस्याएं लंबित पड़ी हुई हैं, जिनका अब तक समाधान नहीं हो पाया है। इन समस्याओं के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गांव 2 केएनजे को नगर परिषद की सीमा में शामिल कर लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद गांव की गलियां, नालियां और आम रास्ते अब भी कच्चे हैं और उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। पुरानी सड़कों की हालत बेहद खराब है। सड़कें टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी हुई हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाता है। इससे आम लोगों और स्कूली विद्यार्थियों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। गांव के दो-तीन मुख्य रास्तों पर बनी पुलिया भी टूट चुकी है, जिससे वाहनों के फंसने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र और जन्म प्रमाण-पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए उन्हें नगर परिषद के चक्कर काटने पड़ते हैं।

गांव में करीब 60 लाख रुपए की लागत से पंचायत भवन का निर्माण किया गया था, लेकिन वह आज तक बंद पड़ा है और वहां मनरेगा से संबंधित कोई कर्मचारी या अधिकारी नहीं बैठता। उन्होंने यह भी बताया कि जब गांव पंचायत था, तब ग्रामीणों को निशुल्क पट्टे दिए गए थे, लेकिन नगर परिषद में शामिल होने के बाद उन पर कब्जा कर लिया गया और अभी तक लोगों को पट्टे वितरित नहीं किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई लाभार्थियों को पहली किश्त तो मिल गई, लेकिन शेष किश्तें नहीं मिलने के कारण मकानों का निर्माण अधूरा रह गया। ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा के कार्य बंद होने के कारण कई लोगों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे स्थानों पर मजदूरी करने जाना पड़ रहा है। गांव में बारिश और गंदे पानी की निकासी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे गंदगी बढ़ती जा रही है। गांव के जोहड़ पायतन में किए गए दो बोरवेल भी वर्तमान में बंद पड़े हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो गांव के लोग आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर राजेन्द्र सुथार, उत्तम नेहरा, मुकेश कुमार, सुखप्रीत सिंह, जसु सिंह, हरदीप सिंह, महेन्द्र तथा राजेन्द्र झाझड़िया सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
