हनुमानगढ़। लंबित मांगों को लेकर आशा सहयोगिनियों ने बुधवार को राजस्थान आशा सहयोगिनी स्वास्थ्य संघ के बैनर तले जिला कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। सहयोगिनियों ने कहा कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायित्व और सम्मानजनक वेतन नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण, सर्वेक्षण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा आपदा के समय वे अग्रिम पंक्ति में कार्य करती हैं। इसके बावजूद उनका भुगतान प्रोत्साहन आधारित है, जो अक्सर अनियमित रहता है।

ज्ञापन में प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था समाप्त कर न्यूनतम 18 हजार रुपए प्रतिमाह निश्चित वेतन लागू करने और वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रावधान करने की मांग की गई। साथ ही नियमितीकरण तथा राजस्थान संविदा नियम 2022 में शामिल किए जाने की भी मांग रखी गई।

सहयोगिनियों ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और संविदा कर्मियों के समान अधिकार प्रदान करने की मांग दोहराई। इसके अलावा पीएफ, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने पर भी जोर दिया गया। आशा सहयोगिनियों ने सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपए की एकमुश्त राशि देने तथा सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग उठाई।

इसके अतिरिक्त एएनएम व सुपरवाइजर पदों पर भर्ती में वरीयता, अनुभव के आधार पर पदोन्नति तथा मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की भी बात कही गई। सहयोगिनियों का कहना है कि न्यूनतम सुविधाओं और नियमित आय के अभाव में उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर प्रदेशाध्यक्ष सीता स्वामी, जिलाध्यक्ष प्रमिला देवी, कोषाध्यक्ष सुन्दर, सचिव कौशल्या, सुनीता वर्मा, गीता, गुरमीत कौर, शिमला, अनुराधा, कौशल्या, कांता, संतोष, रेणु व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थीं।

