रावतसर। अनाज मंडी विस्तार का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अनाज मंडी विस्तार संघर्ष समिति, रावतसर ने वर्ष 2013 से अनुपयोगी पड़ी कृषि उपज मंडी समिति की बहुमूल्य भूमि के आवंटन को लेकर राज्य सरकार से संवेदनशील निर्णय की मांग की है। समिति का कहना है कि वर्षों से खाली पड़ी यह भूमि यदि उपयोग में लाई जाए तो किसानों, व्यापारियों और मंडी समिति—तीनों के हित सध सकते हैं। समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र भारी, सचिव हेमन्त पचार, उपाध्यक्ष रायसिंह बाजिया एवं कोषाध्यक्ष हंसराज लिम्बा के हस्ताक्षरों से जारी ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2013 में आईडीएसएमटी परियोजना के अंतर्गत 485×525 फीट भूमि नगरपालिका द्वारा कृषि उपज मंडी समिति को आवंटित की गई थी। मंडी समिति ने उसी वर्ष 400 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से कुल 1 करोड़ 13 लाख 16 हजार 843 रुपये की राशि भी जमा करवा दी थी। हालांकि, पट्टा शर्तों में लगी प्रतिबंधात्मक धाराओं के कारण यह भूमि अब तक व्यापारियों को आवंटित नहीं हो सकी। स्थानीय निकाय विभाग से शर्तों में शिथिलता नहीं मिलने के चलते व्यापारी आज भी मंडी यार्ड में किराये पर काम करने को मजबूर हैं।

बढ़ता उत्पादन, सीमित सुविधाएं
संघर्ष समिति ने ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में मुख्य मंडी प्रांगण में केवल 78 दुकानें उपलब्ध हैं, जबकि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ फसल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। व्यापारियों की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता और अधिक गंभीर हो गई है। समिति ने स्पष्ट किया कि केवल कॉमन ऑक्शन प्लेटफॉर्म का निर्माण समाधान नहीं है। दुकानों के अभाव में व्यापारी व्यवस्थित रूप से कार्य नहीं कर सकते। साथ ही, खाली प्लेटफॉर्म अवांछित गतिविधियों का केंद्र बन सकता है, जिससे मंडी समिति संभावित आय से भी वंचित रह जाएगी।
सरकार से निर्णय की अपेक्षा
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि किसानों, व्यापारियों और मंडी समिति के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए भूमि का नियमानुसार व्यापारियों को आवंटन कराया जाए। वर्तमान स्थिति में कई योग्य व्यापारी स्थान के अभाव में लाइसेंस प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जिससे राज्य सरकार को भी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है।
