हनुमानगढ़। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के तत्वावधान में जिला स्तर पर आयोजित राजसखी मेला-2026 में रविवार को जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने शिरकत कर मेले का अवलोकन किया। कलक्टर ने मेले में लगी स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए उत्पादों को बारीकी से देखा और उनकी सराहना की। मेले के भ्रमण के दौरान जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव प्रत्येक स्टॉल पर पहुंचे और महिलाओं से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने महिलाओं से उनके उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया, लागत, बिक्री मूल्य तथा मार्केटिंग के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार की मांग के अनुरूप नवाचार करने के लिए प्रेरित किया।

कलक्टर ने कहा कि राजसखी मेला जैसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी बना रही हैं। इस प्रकार के आयोजनों से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ती हैं। राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक वैभव अरोड़ा ने बताया कि मेले में शनिवार शाम को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीकानेर से आए कलाकारों ने राजस्थानी लोक गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिनमें केसरिया बालम जैसे पारंपरिक गीतों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। इसके साथ ही पंजाबी संस्कृति की झलक दिखाते हुए कलाकारों ने गिद्दा और भंगड़ा की ऊर्जावान प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया। लोक संगीत और नृत्य के इस अनूठे संगम ने मेले को उत्सव में बदल दिया, जहां दर्शक देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। इस मौके पर बड़ी संख्या में शहरवासी और ग्रामीण क्षेत्र के लोग मेले में पहुंचे और विभिन्न स्टॉलों से हस्तशिल्प, घरेलू उत्पादों एवं पारंपरिक व्यंजनों की खरीदारी की।
