हनुमानगढ़। जैसे-जैसे होली का पावन पर्व नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे शहर में फागुन की मस्ती और रंगों की खुमारी भी गहराती जा रही है। इन दिनों हनुमानगढ़ पूरी तरह लोकसंस्कृति के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। जंक्शन और टाउन क्षेत्र में चंग की थाप, मंजीरों की झंकार और रसिया गीतों पर झूमते कलाकार आम दृश्य बन चुके हैं। शाम ढलते ही वातावरण पूरी तरह होलीमय हो जाता है और हर ओर उल्लास, उमंग व आनंद की अनुभूति होने लगती है। हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र में सक्रिय श्री इच्छापूर्ण हनुमान मंदिर धमाल मंडली बीते लगभग चार दशकों से चंग-धमाल की परंपरा को जीवित रखे हुए है। मंडली द्वारा हर वर्ष फागुन माह में नियमित रूप से चंग-धमाल कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो अब शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

इस वर्ष भी मंडली ने अपने कार्यक्रमों की शुरुआत कर दी है। यह आयोजन प्रतिदिन रात्रि 8.30 बजे से 11 बजे तक 2 मार्च तक जारी रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन स्थल जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित हनुमान मंदिर के निकट रखा गया है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में शहरवासी एकत्र होकर फागुन रसिया, चंग और मंजीरों की संगत में प्रस्तुत की जा रही सुरीली धमाल का आनंद ले रहे हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों में पारंपरिक लोकधुनों के साथ-साथ भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो श्रोताओं को भावविभोर कर देता है। मंडली के सदस्य अशोक व्यास ने बताया कि 2 मार्च को आयोजन का विशेष आकर्षण देखने को मिलेगा।

इस दिन रेलवे स्टेशन के बाहर आधुनिक शैली में भव्य चंग-धमाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान फूलों की होली खेली जाएगी, जिससे पूरा वातावरण सुगंध और रंगों से भर जाएगा। साथ ही राधा-कृष्ण और भोलेनाथ की आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस अवसर पर कवि, लोकगायक और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। आयोजकों का कहना है कि राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति आज धीरे-धीरे लुप्त होने की कगार पर है। आधुनिकता और पाश्चात्य प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर से दूर होती जा रही है। इसके साथ ही नशे जैसी सामाजिक बुराइयों की ओर युवाओं का झुकाव चिंता का विषय बनता जा रहा है।

ऐसे में चंग-धमाल जैसे आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त प्रयास भी हैं। मंडली का मानना है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने, लोकपरंपराओं के महत्व को समझाने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही ये कार्यक्रम शहर में अमन-चैन, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि श्री इच्छापूर्ण हनुमान मंदिर धमाल मंडली का यह प्रयास सराहनीय है। फागुन के इस माहौल में चंग-धमाल की गूंज न केवल होली के उल्लास को बढ़ा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए लोकसंस्कृति को संजोने का मजबूत संदेश भी दे रही है।

