हनुमानगढ़। शहर में गणगौर का पावन पर्व शनिवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और विसर्जन जुलूस के साथ सम्पन्न हो गया। होली के अगले दिन से शुरू होकर 16 से 18 दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस वर्ष 21 मार्च को तृतीया तिथि के साथ पूर्ण हुआ। जिला मुख्यालय पर जंक्शन के सुरेशिया स्थित वार्ड 58 में मनाया जा रहा गणगौर महोत्सव भी पार्वती (गौरी) और शिव (ईसर) की मिट्टी की मूर्तियों के विसर्जन के साथ सम्पन्न हुआ।

इससे पूर्व पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवतियों ने विसर्जन यात्रा निकाली, जिसमें लोकगीतों और नृत्य के साथ गौरी-ईसर को भावभीनी विदाई दी गई। इस दौरान सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और सुखमय जीवन की कामना के लिए व्रत रखा, वहीं कुंवारी कन्याओं ने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की।

वार्डवासी निर्मला और मनदीप कौर ने बताया कि हिंदू धर्म में गणगौर व्रत का विशेष महत्व है और यह अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि तथा पारिवारिक कल्याण की कामना का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि यह पर्व माता पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, जिससे यह व्रत महिलाओं के लिए आदर्श बन गया है। यह परंपरा स्त्री जीवन में आस्था, विश्वास और समर्पण की भावना को सुदृढ़ करती है। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में उत्सव, श्रद्धा और पारंपरिक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।
