
हनुमानगढ़। वीर बाल दिवस के मौके पर भाजपा की ओर से राज्यव्यापी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में हनुमानगढ़ जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और प्रत्येक मंडल-बूथ पर कार्यक्रम होंगे। इस संबंध में मंगलवार को भाजपा जिला कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू और जिला संयोजक जसप्रीत सिंह ‘जेपी’ ने बताया कि 9 जनवरी 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 26 दिसम्बर को पूरे भारत में वीर बाल दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की थी। इसी क्रम में भाजपा की ओर से प्रत्येक मंडल पर विशेष सभा का आयोजन किया जाएगा। साहिबजादों के बलिदान के बारे में युवाओं को बताया जाएगा। मंडल स्तर पर स्थानीय गुरुद्वारा साहिब में शब्द कीर्तन का कार्यक्रम होगा। जिले में प्रभात फेरी का आयोजन किया जाएगा। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के साथ जिला स्तरीय बौद्धिक संगोष्ठी, प्रदर्शनी, स्कूल-कॉलेजों में विचार संगोष्ठी के साथ भाषण प्रतियोगिता का आयोजन होगा। जिला संयोजक जसप्रीत सिंह ‘जेपी’ ने बताया कि 26 दिसम्बर 1704 का वह दिन जब सिख इतिहास की सबसे बड़ी कुर्बानी दी गई थी। यह कुर्बानी सिखों के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह तथा बाबा फतेह सिंह की थी। उस समय उनकी आयु बेहद छोटी थी। खालसा पंथ की स्थापना के बाद सरहिंद के सूबेदार वजीर खान ने आनंदपुर साहिब के किले पर हमला कर दिया। गुरु गोबिंद सिंह जी उसको सबक सिखाना चाहते थे। मगर कई दिनों के लम्बे घेरे के बाद सिखों ने बड़े खतरे को भांप लिया और गुरु साहिब को किला छोड़ने की प्रार्थना की। 20-21 दिसम्बर 1704 को गुरु साहिब ने अपने परिवार सहित श्रीआनंदपुर साहिब का किला छोड़ दिया पर सरसा नदी में पानी का बहाव ज्यादा तेज होने के कारण गुरु साहिब के दो छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह तथा माता गुजरी जी गुरु साहिब से बिछुड़ गए। उस वक्त माता गुजरी जी गंगू को मिलीं जो किसी समय गुरु घर की सेवा किया करता था। गंगू माता गुजरी को बिछड़े परिवार से मिलाने का भरोसा देकर उन्हें अपने घर ले गया। पर बाद में सोने के चंद सिक्कों के लालच में गंगू ने माता जी और साहिबजादों की खबर वजीर खान को दे दी। वजीर खान के सिपाहियों ने माता गुजरी और साहिबजादे जोरावर सिंह तथा साहिबजादे फतेह सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उनको ठंडे बुर्ज में रखा गया। सुबह होते ही साहिबजादों को वजीर खान के समक्ष पेश किया गया जहां पर उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया। मगर गुरु जी के छोटे साहिबजादों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। जब सिपाहियों ने उन्हें सिर झुकाने के लिए कहा तो दोनों ने जवाब दिया कि हम अकालपुरख के सिवाय किसी के आगे नतमस्तक नहीं होते। हम अपने दादा जी की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे जिन्होंने धर्म के नाम पर अपना शीश कटाना उचित समझा मगर झुकाया नहीं। जब वे दोनों नहीं माने तो वजीर खान ने उन्हें जिंदा दीवारों में चिनवाने का हुक्म दे डाला। कहा जाता है कि जब दोनों साहिबजादों को दीवार में चिनवाना शुरू किया गया तो उन्होंने जपुजी साहिब का पाठ करना शुरू कर दिया तथा दीवार पूरी होने के बाद भीत्र से जयकारे की आवाज आई। साहिबजादों ने गुरु घर के महान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपनी जानें न्यौछावर कर दीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदीप ऐरी भी मौजूद रहे।
