हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड स्थानीय संघ हनुमानगढ़ टाउन के तत्वावधान में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपप्रधान राजेन्द्र बंसल ने की। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य दिव्या शर्मा, ट्रेनिंग काउंसलर योगमाया राठौड़, शिक्षाविद् सुरेन्द्र शर्मा, वीरेंद्र छापोला, ट्रेनिंग काउंसलर भूपेंद्र कौशिक, सचिव पृथ्वी सिंह, ट्रेनिंग काउंसलर अमीलाल छापोला व विद्यालय व्यवस्थापक योगेश शर्मा ने डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। विचार गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का व्यक्तित्व भारतीय सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास में एक ऐसे बौद्धिक व नैतिक शिखर के रूप में स्थापित है, जिन्होंने समाज को समता, न्याय और बंधुत्व के आधुनिक मूल्यों से आलोकित किया। स्थानीय संघ सचिव पृथ्वी सिंह ने कहा कि बाबा साहेब की जयंती तभी सार्थक होगी, जब हम उनके बताए मार्ग का अनुसरण करें और उनके साहित्य का अध्ययन करें। उन्होंने बाबा साहेब के कथन ‘मैं मूर्ति में नहीं, किताबों में हूंÓ का उल्लेख करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। शिक्षाविद् वीरेंद्र छापोला ने डॉ. अंबेडकर के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे अंबेडकर ने सामाजिक भेदभाव के बावजूद अपने संघर्ष को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा उनके लिए सामाजिक मुक्ति का सबसे सशक्त साधन थी। उन्होंने संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में संविधान निर्माण की प्रक्रिया के प्रमुख स्तंभ रहे और उन्होंने अपने ज्ञान को समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया।
