रावतसर। सेमग्रस्त क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मामला तहसील रावतसर के चक 1 के एलएम, 2 के एलएम, 3 के एलएम, 4 एसपीडी, 4 एसपीडीए, 2 एसपीडी, 2 केबीएम, 3 जेडडब्ल्यूडी, 4 जेडडब्ल्यूडी और 5 जेडडब्ल्यूडी से जुड़ा है, जहां पिछले करीब 35–40 वर्षों से जलभराव (सेम) की समस्या बनी हुई है। किसानों का कहना है कि सेम के कारण हजारों बीघा कृषि भूमि बर्बाद हो रही है। खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं और जमीन लगातार बंजर होती जा रही है। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की, लेकिन जलभराव के चलते उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के अनुसार वे अपनी ही जमीन पर मजबूर और लाचार हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सेम की मार मकानों तक पहुंच चुकी है। कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, नींव कमजोर हो चुकी है और कुछ मकान गिर भी चुके हैं। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र का विद्यालय भी जलभराव से प्रभावित है। स्कूल तक जाने वाला रास्ता बाधित होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावक उन्हें भेजने में डर महसूस कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा समस्या के समाधान के लिए पैकेज नंबर 353 स्वीकृत किया गया था, जिसके तहत जीडीसी की आरडी नंबर 149 पर साईफन तथा संबंधित चकों के लिए सेमनाला निर्माण प्रस्तावित है। उनका कहना है कि आरडी 149 से बडोपल तक सेमनाला पहले से खुदा हुआ है और बडोपल में चार पंप हाउस मोटरें स्थापित हैं। वर्तमान में जीडीसी नाला भी खाली है, इसलिए तकनीकी रूप से कार्य शुरू करने का अनुकूल समय है। किसानों का आरोप है कि 10–11 जनवरी 2026 को धरने के दौरान तहसीलदार पायल अग्रवाल और जल संसाधन विभाग सूरतगढ़ के सहायक अभियंता दिनेश खत्री ने 20 जनवरी से काम शुरू कराने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन 23 फरवरी तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। 16 फरवरी को दोबारा ज्ञापन देने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसानों में रोष है।

किसानों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द साईफन और सेमनाला निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो 5 मार्च को सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ उपखंड अधिकारी कार्यालय पर ट्रैक्टर मार्च निकालकर घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन और रास्ता रोको आंदोलन की चेतावनी दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे दशकों से समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। अब किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

