हनुमानगढ़। केन्द्र सरकार की नीतियों के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राजस्थान में व्यापक जनसंघर्ष छेड़ने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से बीज-बिजली विधेयक, चार श्रम संहिताओं, अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों तथा अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी जनसंघर्ष जत्था अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत 26 फरवरी को हनुमानगढ़ से होगी और समापन 7 मार्च को जयपुर में किया जाएगा। इसके साथ ही सभी जिलों में जिला स्तरीय जत्थे और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। अभियान के समापन के बाद 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में चेतावनी रैली आयोजित की जाएगी।

जंक्शन स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोलित ब्यूरो सदस्य एवं सांसद अमराराम, विजू कृष्णन, राज्य सचिव किशन पारीक, राज्य सचिव मंडल सदस्य रामेश्वर वर्मा और रघुवीर वर्मा ने संयुक्त रूप से अभियान की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी। सांसद अमराराम ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बिजली विधेयक 2025 के जरिए बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे बिजली क्षेत्र पर कॉरपोरेट घरानों का नियंत्रण बढ़ेगा और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाला जाएगा।

उन्होंने स्मार्ट मीटर प्रणाली को भी इसी दिशा में कदम बताते हुए कहा कि ‘पहले भुगतान, फिर बिजली की व्यवस्था आमजन के लिए परेशानी खड़ी करेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी जैसे संघर्षां से हासिल अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने केन्द्र सरकार के नए बीज विधेयक पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, बिना सरकारी पंजीकरण के बीज या पौधा बेचने पर रोक लगाने से छोटे बीज विक्रेताओं, नर्सरी संचालकों और किसानों को नुकसान होगा।

विजू कृष्णन ने कहा कि व्यापार मुक्त समझौतों और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों से किसानों की आय और आत्मनिर्भरता प्रभावित होगी। चार श्रम संहिताओं को लेकर पार्टी नेताओं ने कहा कि इससे मजदूर वर्ग के संगठित होने के अधिकार और श्रमिक सुरक्षा कमजोर होगी। उनका आरोप था कि श्रम कानूनों में बदलाव कर मजदूरों के संघर्षांे से प्राप्त अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।
राज्य और केन्द्र सरकार पर निशाना
किशन पारीक ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रतिपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में रिक्त पदों, दवाइयों की आपूर्ति तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। रामेश्वर वर्मा और रघुवीर वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार जनहित की योजनाओं को कमजोर कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है। सीपीएम नेताओं ने कहा कि जैसे तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने एकजुट होकर सरकार को निर्णय वापस लेने पर मजबूर किया था, उसी प्रकार व्यापक जनआंदोलन के जरिए इन नीतियों का विरोध किया जाएगा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि राज्यव्यापी जत्था अभियान के माध्यम से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनता को इन मुद्दों से अवगत कराएं और 24 मार्च की दिल्ली रैली में बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करें। पार्टी का दावा है कि यह अभियान केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनचेतना और अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक संघर्ष का रूप लेगा।
