- हत्या सहित आर्म्स एक्ट के आरोपों में दोषसिद्ध, पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोधासिंह भाटी ने की प्रभावी पैरवी
हनुमानगढ़। करीब 16 वर्ष पुराने हत्या के मामले में आखिरकार न्यायालय ने फैसला सुना दिया। हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में वर्ष 2010 में दर्ज चर्चित प्रकरण में अपर जिला एवं सेशन न्यायालय, रावतसर ने अभियुक्त बलराम यादव पुत्र नन्दराम निवासी सुरेशिया को हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त पर विभिन्न धाराओं में अर्थदंड भी लगाया है। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोधासिंह भाटी एवं अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह नरूका ने पैरवी की। दोनों अधिवक्ताओं ने सजा के बिंदु पर भी न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। परिवादी पक्ष की ओर से अभियुक्त को गंभीर अपराध के मद्देनजर कठोर दंड दिए जाने का आग्रह किया गया था।
घर में घुसकर फायरिंग का आरोप
न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार मामला एफआईआर संख्या 131/2010, पुलिस थाना हनुमानगढ़ जंक्शन से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार घटना में हथियारों से लैस होकर घर में घुसकर फायरिंग की गई थी, जिसमें कुलवीर सिंह की गोली लगने से मृत्यु हो गई थी। पुलिस अनुसंधान के बाद बलराम यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या एवं अन्य धाराओं में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन एवं बचाव पक्ष की ओर से बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय ने विभिन्न दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्यों का भी परीक्षण किया।
इन धाराओं में हुई सजा
न्यायालय के आदेश के अनुसार बलराम यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 460 तथा आयुध अधिनियम की धारा 3/25(1-बी)(ए) और 3/27 के तहत दोषसिद्ध किया गया।
धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास की कठोर सजा एवं 20 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 460 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपए अर्थदंड।
आयुध अधिनियम की धारा 3/25(1-बी)(ए) के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास एवं 3 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 3/27 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं 3 हजार रुपए अर्थदंड।
न्यायालय ने सभी मूल सजाएं साथ-साथ भुगतने के आदेश दिए हैं।
मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद
न्यायालय ने अपने निर्णय में माना कि बलराम यादव द्वारा हत्या का अपराध किया जाना सिद्ध हुआ है। हालांकि परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने मृत्युदंड के स्थान पर आजीवन कारावास की सजा को उचित माना। स्थानीय स्तर पर बलराम यादव को जंक्शन थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बताया जाता रहा है, हालांकि उपलब्ध न्यायिक आदेश में इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं है। करीब 16 वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 1 अक्टूबर 2026 को न्यायालय ने निर्णय एवं दण्डादेश सुनाया।
