हनुमानगढ़। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न होकर जीवन मूल्यों और संस्कारों से जुड़ी हो, तो वह समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बनती है। इसी सोच को साकार करते हुए टाउन क्षेत्र में वर्ष 1997 में स्थापित पालस चिल्ड्रन एकेडमी आज एक वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। सीमित संसाधनों से आरंभ हुआ यह संस्थान आज शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जहां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यालय के संचालक चानणराम चौधरी ने बताया कि संस्थान की शुरुआत नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी कक्षाओं से की गई थी। उस समय उद्देश्य केवल बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देना नहीं था, बल्कि उनमें अच्छे संस्कारों की नींव डालना भी था। समय के साथ अभिभावकों के विश्वास और शिक्षकों के समर्पण से विद्यालय निरंतर प्रगति करता गया।

आज यहां आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित हो रही है और लगभग 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संस्थान की पहचान उसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली से बनी है। यहां बच्चों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा नहीं दी जाती, बल्कि विषयों की गहरी समझ विकसित करने पर जोर दिया जाता है। विद्यालय में योग्यताधारी और अनुभवी शिक्षकों का स्टाफ कार्यरत है, जो आधुनिक शिक्षण तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। एलईडी, ऑडियो-वीडियो और अन्य डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को रोचक एवं प्रभावी बनाया जाता है, जिससे बच्चों की सीखने में रुचि बनी रहती है और उनकी नींव मजबूत होती है। सत्र 2023-24 विद्यालय के लिए विशेष उपलब्धियों वाला रहा। इस दौरान विद्यालय की छात्रा सौम्या ने राजस्थान स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया। इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार में हर्ष और गर्व का वातावरण है।

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है। यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है। पालस चिल्ड्रन एकेडमी की विशेषता यह है कि यहां शिक्षा के साथ संस्कारों को समान महत्व दिया जाता है। संचालक चानणराम चौधरी का मानना है कि केवल पढ़ाई में होशियार होना ही पर्याप्त नहीं है। यदि बच्चों में नैतिक मूल्य, अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव नहीं होगा, तो शिक्षा अधूरी रह जाएगी। विद्यालय का उद्देश्य ऐसे संस्कारित नागरिक तैयार करना है, जो भविष्य में ईमानदार अधिकारी, कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि बनकर समाज और राष्ट्र की सच्ची सेवा कर सकें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में नियमित रूप से संस्कार आधारित गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। यहां प्रत्येक सप्ताह या पखवाड़े में हवन-यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिससे विद्यालय का वातावरण शुद्ध, शांत और सकारात्मक बना रहता है। प्रबंधन का विश्वास है कि सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासित वातावरण बच्चों के मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सह-शैक्षणिक और खेल गतिविधियों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया गया है। नियमित योगाभ्यास से बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन और एकाग्रता को भी सुदृढ़ किया जाता है। इसके अतिरिक्त शतरंज (चेस) और विभिन्न खेल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, निर्णय क्षमता, टीम भावना और नेतृत्व कौशल का विकास किया जाता है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि खेल और योग बच्चों को अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास सिखाते हैं, जो जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होते हैं। इसी कारण पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए चानणराम चौधरी ने बताया कि विद्यालय को और अधिक विस्तृत स्तर पर विकसित करने की योजना है। आने वाले समय में नई कक्षाओं का संचालन, आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को और मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका लक्ष्य है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बच्चों को एक समान, संस्कारयुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को केवल डिग्री प्राप्त करने की दौड़ में न डालें, बल्कि उन्हें ऐसे संस्थान से जोड़ें जहां शिक्षा के साथ संस्कारों का भी विकास हो।

उन्होंने कहा कि मजबूत नींव पर ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है। कुल मिलाकर, पालस चिल्ड्रन एकेडमी ने पिछले करीब तीन दशकों में यह सिद्ध किया है कि यदि शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और संस्कारों का समावेश हो, तो एक छोटा सा पौधा भी समय के साथ वटवृक्ष बन सकता है। यह संस्थान आज न केवल शिक्षा का केन्द्र है, बल्कि समाज निर्माण की दिशा में एक सशक्त प्रयास भी है, जो आने वाली पीढ़ियों को सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रहा है।
