हनुमानगढ़। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से रॉकेट लर्निंग संस्था द्वारा जिले में 27 फरवरी से ‘मिशन बुनियाद’ कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा से जोड़कर प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करना है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बच्चों की सीखने की क्षमता और बौद्धिक विकास को शुरुआती स्तर पर ही सुदृढ़ किया जा सके।महिला एवं बाल विकास विभाग उपनिदेशक श्रीमती ज्योति ने बताया कि मिशन बुनियाद के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कौशल विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से ईसीई (प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा) के महत्व तथा बाल विकास के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। साथ ही खेल-आधारित शिक्षण पद्धति की जानकारी दी जा रही है, जिससे कार्यकर्ता बच्चों को खेल-खेल में प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। सभी शैक्षणिक सामग्री स्थानीय व सरल भाषा में तैयार की गई है, ताकि कार्यकर्ता और अभिभावक इसे आसानी से समझ सकें। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्रमाण-पत्र और ‘स्टार’ देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। रॉकेट लर्निंग एक गैर-सरकारी संस्था है, जो प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल और प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के मिश्रित मॉडल पर कार्य कर रही है। संस्था वर्तमान में राजस्थान सहित देश के 13 राज्यों के 150 से अधिक जिलों में सक्रिय है और इसके नेटवर्क से 2 करोड़ से अधिक बच्चे तथा 2 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जुड़े हुए हैं। संस्था के अनुसार इस पहल का लक्ष्य हनुमानगढ़ की प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को कुशल शिक्षिका के रूप में सशक्त बनाना है, ताकि हर बच्चे को स्कूल जाने से पहले गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा मिल सके।
