– पूर्व वर्षां की तरह 20 प्रतिशत अनुपात करने अथवा अनिवार्यता समाप्त करने की मांग
हनुमानगढ़। जिले के शराब अनुज्ञाधारियों ने मदिरा दुकानों पर 50 यूपी मदिरा के 40 प्रतिशत उठाव की अनिवार्यता के विरोध में सोमवार को टाउन स्थित जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान अनुज्ञाधारियों ने जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 50 यूपी मदिरा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। अनुज्ञाधारियों ने बताया कि राज्य सरकार के 28 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025-29 के तहत निर्धारित देशी मदिरा की गारंटी राशि में न्यूनतम 25 प्रतिशत राजस्थान निर्मित मदिरा (आरएमएल) के लिए निर्धारित है। शेष देशी मदिरा के हिस्से में 50 यूपी मदिरा के उठाव की मात्रा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है। अनुज्ञाधारियों का कहना है कि 50 यूपी शराब की 40 प्रतिशत अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है और इससे शराब व्यवसायियों पर आर्थिक भार पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ जिले में पूर्व में भी कई बार 50 यूपी मदिरा का अनुपात 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया जा चुका है। वर्ष 2019-20, 2021-22, 2022-23 तथा 2023-24 में विभागीय आदेशों के माध्यम से जिले में 50 यूपी मदिरा का अनुपात 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया गया था। अनुज्ञाधारियों ने कहा कि जिन वर्षांे में 50 यूपी का अनुपात 40 प्रतिशत रहा, उस समय शराब दुकानों का बंदोबस्त कराने में भी परेशानी आई। बाद में अनुपात घटाकर 20 प्रतिशत किए जाने के बाद दुकानों का बंदोबस्त हो सका। वर्ष 2022-23 में भी बंदोबस्त नहीं होने के बाद 16 मार्च 2022 को 50 यूपी का अनुपात 20 प्रतिशत किए जाने के बाद ही बंदोबस्त हो पाया था। अनुज्ञाधारियों ने कहा कि वर्ष 2024-25 से वर्तमान आदेश तक 50 यूपी शराब के उठाव की कोई अनिवार्यता नहीं होने से अनुज्ञाधारियों ने ग्राहकों की मांग के अनुसार ही मदिरा का उठाव किया। इससे 50 यूपी मदिरा के ग्राहकों की संख्या लगातार कम हुई है। साथ ही आरएमएल मदिरा की उपलब्धता के कारण भी ग्राहक कम तीव्रता वाली शराब को अधिक पसंद नहीं कर रहे हैं। अनुज्ञाधारियों ने मांग की कि आगामी बंदोबस्त और अनुज्ञाधारियों के हितों के साथ ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए 50 यूपी मदिरा की 40 प्रतिशत अनिवार्यता समाप्त की जाए और वर्ष 2024-25 से वर्तमान व्यवस्था की तरह इसे अनिवार्य नहीं रखा जाए।
